शिमला। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति में भी गर्माहट बढ़ गई है। हिमाचल सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार राज्यों के चुनाव खत्म होते ही केंद्र सरकार ने जनता पर महंगाई का नया बम फोड़ दिया है।

मोदी सरकार ने छीना जनता के मुंह से निवाला

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पहले घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी कर होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट कारोबार को झटका दिया गया और अब पेट्रोल-डीजल महंगा कर आम लोगों की जेब पर सीधा हमला किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे आम जनता के मुंह का निवाला तक छिनता जा रहा है।

 

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चुनाव खत्म होते ही बढ़ा दिया जनता पर बोझ

विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावों के दौरान पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए, लेकिन जैसे ही मतदान प्रक्रिया खत्म हुई, तेल कंपनियों ने कीमतों में इजाफा कर दिया। उन्होंने इसे जनता के साथ सीधा धोखा करार दिया। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से मध्यम वर्ग, गरीब परिवार, किसान और बागवान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से अब सीमेंट, सरिया, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा के सामानों के दाम भी बढ़ेंगे, जिसका असर सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंचेगा।

 

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पर्यटन सीजन पर भी पड़ेगा असर

लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि हिमाचल में इस समय पर्यटन सीजन चरम पर है और शिमला, मनाली, धर्मशाला समेत प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। ऐसे समय में ईंधन और गैस की कीमतों में वृद्धि से होटल उद्योग, टैक्सी ऑपरेटर और छोटे कारोबारी बुरी तरह प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि कमर्शियल गैस पहले ही महंगी हो चुकी है, जिसके कारण होटल और ढाबा संचालकों को खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। अब पेट्रोल और डीजल महंगा होने से पर्यटन उद्योग पर दोहरी मार पड़ेगी।

 

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर हुई भारत की कूटनीति

विक्रमादित्य सिंह ने ईरान समेत पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को वैश्विक स्तर पर मजबूत कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए थे ताकि देश में ईंधन संकट और महंगाई का असर कम हो सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मसले पर सभी दलों की बैठक बुलाकर राष्ट्रीय स्तर पर समाधान निकालना चाहिए ताकि विकास कार्यों और आम जनता दोनों को राहत मिल सके।

सड़क निर्माण परियोजनाओं पर भी संकट

लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ बिटुमन के दामों में बढ़ोतरी से हिमाचल में सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार ने इस सीजन में करीब 500 किलोमीटर सड़क टायरिंग का लक्ष्य रखा था, लेकिन बढ़ती लागत के कारण ठेकेदार काम करने से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल हिमाचल का मुद्दा नहीं बल्कि देशभर के राज्यों के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो विकास परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

 

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“सोना मत खरीदो” बयान पर भी साधा निशाना

विक्रमादित्य सिंह ने प्रधानमंत्री की उस अपील पर भी सवाल उठाए, जिसमें लोगों से कम गाड़ी चलाने और सोना खरीदने से बचने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों का असर छोटे व्यापारियों और सुनारों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के हितों को प्राथमिकता देकर फैसले लेने चाहिए, न कि केवल राजनीतिक नजरिए से। मुख्यमंत्री ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर हिमाचल के लोगों की चिंताओं से अवगत करवाया है।

 

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नगर निगम चुनावों में कांग्रेस ने झोंकी ताकत

नगर निगम चुनावों को लेकर विक्रमादित्य सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस ने पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ा है और पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। उन्होंने कहा कि जनता के सामने शहरी विकास का स्पष्ट रोडमैप रखा गया है और अब फैसला मतदाताओं के हाथ में है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को शहरी विकास के लिए 5400 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे गए थे, जिनमें से 1200 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी है। इससे धर्मशाला, मंडी, पालमपुर, सोलन समेत कई शहरी निकायों में विकास कार्यों को गति मिलेगी।

 

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पर्यटन सीजन में बढ़ी गंदगी पर चिंता

प्रदेश में बढ़ते पर्यटन दबाव के बीच विक्रमादित्य सिंह ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से हजारों टन कूड़ा उत्पन्न हो रहा है और उसके वैज्ञानिक निस्तारण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बायो-डिस्पोजल प्लांटों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में सरकार काम करेगी ताकि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण सुरक्षित रह सके।

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