शिमला। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस घटनाक्रम पर बड़ा बयान देते हुए इसे देशभर के युवाओं के संघर्ष की जीत बताया। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की लड़ाई अभी बाकी है।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि देशभर के युवाओं ने बिना किसी राजनीतिक दल, जाति, क्षेत्र या विचारधारा से ऊपर उठकर अपनी आवाज बुलंद की और उसी संघर्ष का परिणाम आज सबके सामने है।

यह पहला कदम है, अभी मंजिल बाकी है

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वागत योग्य है, लेकिन यह फैसला काफी पहले हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जब पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आईं, छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा और उनके साथ लाठीचार्ज जैसी घटनाएं हुईं, तभी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अब इस्तीफा आने से यह साबित हुआ है कि लोकतंत्र में जनता और युवाओं की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे संघर्ष का अंत नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अभी कई स्तरों पर सुधार किए जाने की जरूरत है।

 

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सोशल मीडिया पर भी दिया मजबूत संदेश

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विक्रमादित्य सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी एक संदेश साझा किया, जिसने राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा बटोरी।

 

उन्होंने लिखा— "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए! अगर आप डरते नहीं हैं और सत्ता के अहंकार के आगे सिर नहीं झुकाते, तो बड़ी से बड़ी हुकूमत को भी झुकना पड़ता है। लोकतंत्र में डरना नहीं, बोलना सीखना है।"

 

इस पोस्ट को उनके समर्थक युवाओं के संघर्ष और लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत से जोड़कर देख रहे हैं।

 

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शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उठाई मांग

विक्रमादित्य सिंह ने आरोप लगाया कि देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखते हुए योग्यता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार और निष्पक्ष प्रणाली की मांग को लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी जारी रखें।

 

 

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कुलदीप राठौर बोले— यह छात्रों की आवाज की जीत

AICC के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को छात्रों के आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों की जीत है जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई।

 

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राठौर ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय लगातार विवादों में रहा और मंत्रालय हालात को प्रभावी ढंग से संभालने में सफल नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनकी किसी व्यक्ति विशेष से व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है, लेकिन शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में बेहतर नेतृत्व और व्यापक सुधार समय की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाए जाने चाहिए।

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