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July 25, 2026
सुक्खू सरकार का एक और बड़ा फैसला: अब 'एक अधिकारी-एक सरकारी गाड़ी'; अन्य वाहन होंगे वापस
आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार का बड़ा कदम, फिजूलखर्ची पर कसेगी लगाम
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शिमला। आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार लगातार सख्त और बड़े फैसले ले रही है। सरकारी खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में उठाए गए कई कदमों के सकारात्मक परिणाम भी अब सामने आने लगे हैं। इसी कड़ी में सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है।
सरकार ने तय किया है कि अब एक अधिकारी को केवल एक ही सरकारी वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों का अतिरिक्त प्रभार होने के कारण कई सरकारी गाड़ियां हैं, उनसे अतिरिक्त वाहन वापस ले लिए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार सरकार प्रशासनिक खर्चों में कटौती के उद्देश्य से सरकारी वाहनों की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करने जा रही है। प्रस्ताव के तहत सचिव और निदेशक स्तर के उन अधिकारियों की समीक्षा की जाएगी, जिनके पास अलग-अलग विभागों के नाम पर एक से अधिक सरकारी वाहन उपलब्ध हैं। सरकार का मानना है कि एक अधिकारी अपने सभी विभागीय कार्यों का संचालन एक ही सरकारी वाहन से प्रभावी ढंग से कर सकता है। ऐसे में अतिरिक्त वाहनों पर होने वाला खर्च अनावश्यक माना जा रहा है।
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सरकारी वाहनों की संख्या कम होने से सरकार को ईंधन, मरम्मत, रखरखाव और चालकों के वेतन पर होने वाले खर्च में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखते हुए सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद सभी विभागों से अधिकारियों के पास उपलब्ध सरकारी वाहनों का विस्तृत विवरण मांगा जाएगा। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि किन अधिकारियों के पास आवश्यकता से अधिक वाहन हैं और उनसे अतिरिक्त वाहन वापस लिए जाएंगे।
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सरकार की योजना है कि वापस लिए गए वाहनों को उन विभागों और फील्ड कार्यालयों को उपलब्ध कराया जाए, जहां वास्तव में सरकारी वाहनों की कमी है। इससे नए वाहन खरीदने की जरूरत भी कम होगी और मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
सुक्खू सरकार इसे केवल खर्च में कटौती का फैसला नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मान रही है। सरकार का दावा है कि इससे प्रशासनिक कार्यों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, बल्कि सीमित संसाधनों का अधिक दक्षता के साथ उपयोग होगा और सरकारी धन की बचत भी सुनिश्चित होगी। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो हिमाचल प्रदेश में सरकारी वाहनों के आवंटन की प्रणाली में यह अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा।