शिमला। हिमाचल प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज होता नजर आ रहा है। हिमाचल कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर एक ऐसी पोस्ट साझा की है, जिसने दिल्ली से लेकर शिमला तक राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बहाने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधने के अपने चिर.परिचित अंदाज में विक्रमादित्य सिंह ने इस बार हिंद महासागर में बढ़ते तनाव और भारत की कूटनीतिक भूमिका को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया है, लेकिन उनके शब्दों के निशाने पर सीधे तौर पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व है।
सोशल मीडिया पोस्ट से गरमाई राजनीति
मंत्री की पोस्ट ऐसे समय सामने आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया में तनाव की खबरें चर्चा में हैं। अपने संदेश में उन्होंने वैश्विक घटनाक्रम और भारत की कूटनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने इशारों-इशारों में यह भी कहा कि बड़े-बड़े नारों और मजबूत नेतृत्व के दावों के बीच कई बार वास्तविक परिस्थितियों में देश की भूमिका पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
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केंद्र की मोदी सरकार पर कसा तंज
विक्रमादित्य सिंह ने हिंद महासागर में अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की हालिया घटना का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार की 'चुप्पी' पर सवाल उठाए। उन्होंने इस मामले को भारत की मेजबानी में हुए 'इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू-2026' से जोड़ते हुए कहा कि जिस ईरानी जहाज को निशाना बनाया गया, वह कुछ समय पहले भारत का मेहमान था।
मंत्री ने तीखा तंज कसते हुए लिखा कि 'वसुधैव कुटुंबकम' के नारे लगाना और विदेशी मेहमानों के साथ फोटो खिंचवाना तो आसान है, लेकिन जब वही मेहमान संकट में घिरता है, तो मेजबान का दूर बैठकर तमाशा देखना उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।
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'अतिथि देवो भव:' की नई व्याख्या पर सवाल
हिमाचल कांग्रेस के इस युवा नेता ने केंद्र के 'विश्वगुरु' वाले दावे पर प्रहार करते हुए कहा कि संकट के समय ही किसी नेतृत्व के चरित्र की असली परीक्षा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब 'अतिथि देवो भव:' का अर्थ केवल औपचारिक बयानों तक सीमित रह गया है? विक्रमादित्य ने लिखा कि जब एक मित्र राष्ट्र का जहाज समुद्र में डूब रहा था, तब दिल्ली की ओर से केवल यह कहना कि 'हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं', जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डर के साये में कूटनीतिक चुप्पी ओढ़ लेना एक मजबूत राष्ट्र की पहचान नहीं हो सकती।
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राजनीतिक गलियारों में गरमाहट: '56 इंच' पर तंज
इस पूरी पोस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा उनके अंतिम शब्दों की हो रही है, जहां उन्होंने '56 इंच?' लिखकर सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के मजबूत नेतृत्व के दावों को चुनौती दी है। विक्रमादित्य सिंह ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के लिए मानवीय संवेदनाओं और मित्रता से ज्यादा 'फोटो-ऑप' वाली राजनीति और रणनीतिक साझेदारियां अहम हो गई हैं। उन्होंने तंज कसा कि बड़े-बड़े पोस्टरों और शौर्य के नारों के बीच असल कूटनीतिक हिम्मत कहीं खो गई है।
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हिमाचल की सियासत पर असर
मंत्री की इस पोस्ट के बाद प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज होने के आसार हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विक्रमादित्य सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दे को उठाकर न केवल केंद्र की विदेश नीति पर सवाल दागे हैं, बल्कि खुद को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। बिना नाम लिए किया गया यह हमला आगामी चुनावों और प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
