धर्मशाला हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार धारा 118 में बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है और विपक्ष इसे सीधे-सीधे हिमाचल को बेचने की शुरुआत बता रहा है। पहाड़ों में जमीन खरीद पर सबसे बड़ी रोक माने जाने वाले हिमाचल प्रदेश अभिधृति एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 को सरकार सरल बनाने जा रही है। जिसे लेकर आज विधानसभा में प्रस्ताव भी रखा जाएगा।

क्या उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने की तैयारी?

इस कदम को लेकर सियासी हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब हिमाचल की जमीन उद्योगपतियों के लिए और आसान हो जाएगी? क्या पहाड़ों की भूमि बड़े कारोबारी घरानों के लिए खोली जा रही है? यही बहस अब सदन में गरमाने वाली है।

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118 में बड़ा संशोधन आज पटल पर

राज्य के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी मंगलवार को हिमाचल प्रदेश अभिधृति एवं भूमि सुधार संशोधन विधेयक 2025 को सदन में पेश करेंगे। इस विधेयक में धारा 118 के तहत बनाए जाने वाले नियमों में संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि-

  • राज्य में उद्योग लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराना आसान हो
  • विभिन्न श्रेणियों के स्टार्टअप, सेवाक्षेत्र और कारोबार को भूमि प्राप्ति में छूट मिल सके
  • निवेश बढ़ाकर रोजगार उत्पन्न किए जा सकें

सरकार का दावा है कि निवेश बढ़ाने और रोजगार पैदा करने के लिए यह बदलाव जरूरी है। लेकिन विरोधियों का आरोप है कि यह हिमाचल के पहाड़ों को बड़े कॉर्पोरेट घरानों के लिए खोलने का रास्ता है।

सदन में तेज होने वाली बहस

विधेयक पर आगामी दिनों में विस्तृत चर्चा होगी जहां विपक्ष धारा 118 पर सवाल उठाएगा कि

  • क्या इससे पहाड़ी लोगों की जमीन सुरक्षित रहेगी?
  • क्या बाहरी पूंजी के नाम पर हिमाचली पहचान को खतरा होगा?
  • क्या यह राज्य की भूमि नीति को कमजोर करने की शुरुआत है?
  • 118 पर पिछले दो दशकों में हर सरकार को विरोध झेलना पड़ा है और अब फिर वही राजनीतिक तूफान लौटने वाला है।

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पटल पर रखा जाएगा एक और संशोधन

इसी के साथ उद्योग, श्रम एवं रोजगार मंत्री दुकान एवं वाणिज्यिक स्थापना संशोधन विधेयक 2025 भी सदन में रखेंगे।

केंद्र के नए कानूनों के अनुरूप अब-

  • काम के घंटे बढ़ेंगे
  • हर तीन महीनों में ओवरटाइम सीमा 115 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे
  • कर्मचारी की सहमति पर बढ़े हुए समय का अलग मानदेय मिलेगा
  • कुछ और प्रतिष्ठान भी इस कानून के दायरे में लाए जाएंगे

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सरकार इसे व्यवसाय के अनुकूल वातावरण बताती है, जबकि विरोधी कह रहे हैं कि पहले जमीन उद्योगपतियों को, अब कर्मचारियों से अधिक काम यह किसके हित में है? वहीं, धारा 118 हिमाचल की पहचान, उसके जनसंख्या संतुलन और सांस्कृतिक संरचना का सुरक्षा कवच मानी जाती है। अब जब सरकार इसे आसान बना रही हैसियासी तूफान उठना तय है।

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