शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पंचायती राज आरक्षण रोस्टर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विधानसभा सत्र के दौरान आज सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्षी विधायकों ने विधानसभा परिसर में नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ कर रही है।

सत्ता पक्ष कर रहा राजनीतिक हित साधने की कोशिश

दरअसल, विपक्ष का कहना है कि पंचायतों में आरक्षण के रोस्टर में बदलाव कर सत्ता पक्ष अपने राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रहा है। इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोला।

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को “उल्टे फैसले लेने की आदत” हो गई है और यही कारण है कि ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनसे लोकतंत्र की मूल भावना प्रभावित हो रही है।

पारदर्शिता और निष्पक्षता पर खड़े होंगे सवाल

विपक्ष विशेष रूप से उस प्रावधान का विरोध कर रहा है, जिसमें जिलाधीश को पांच प्रतिशत पंचायतों में आरक्षण तय करने का अधिकार देने की बात कही गई है। विपक्ष का तर्क है कि इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे, क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की शक्तियां देने से राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका बढ़ सकती है।

फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग

विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार पंचायत चुनावों से पहले आरक्षण रोस्टर में बदलाव कर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यह कदम न केवल संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने वाला भी है।

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प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव जैसे संवेदनशील मुद्दों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं

हालांकि, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है। पंचायत चुनावों से पहले आरक्षण रोस्टर को लेकर छिड़ा यह विवाद प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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