शिमला। हिमाचल सरकार के विभिन्न विभागों में तैनात 35 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को काम के बेहतर परिस्थिति देने के लिए भाजपा सदस्य सुखराम चौधरी के संकल्प पर शनिवार को राज्य विधानसभा ने गंभीर चर्चा की।
डॉ. हंसराज बोले 11 हजार कर्मी निकाले
चर्चा में भाग लेते हुए विधायक डॉ. हंसराज ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 11-12 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। इनमें वह कर्मचारी भी शामिल है जिन्होंने कोरोना काल में अपना जीवन जोखिम में डालकर सेवाएं की।
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विधायक विनोद कुमार ने कहा कि जब पीटीए, एसएमसी या पैरा टीचर के लिए नीति बन सकती है तो आउटसोर्स के लिए क्यों नहीं।
संकल्प पेश करते बोले सुखराम
सुखराम चौधरी ने संकल्प पेश करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत लगभग 35 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि शोषण को रोकने के लिए प्रदेश में हरियाणा की तर्ज पर नीति बनाई जानी चाहिए और इसमें आरक्षण समेत अन्य सुविधाओं का भी प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल में मौजूदा आउटसोर्स नीति दोषपूर्ण है।
सरकार ने मानी शोषण की बात
डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने अपने जवाब में कहा कि राज्य में भाजपा सरकार 2009 में आउटसोर्स की नीति लेकर आई थी। लेकिन तब से लेकर आज तक आउटसोर्स कर्मियों को न्यूनतम वेतन उपलब्ध कराने के लिए कोई मानक प्रक्रिया नहीं बनाई गई।
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उन्होंने कहा कि ठेकेदार खुद मॉडल टेंडर पेपर 2021 का पालन नहीं कर रहे हैं। वे मनचाहा कमीशन काटकर आउटसोर्स को सैलरी देते हैं।
कैबिनेट सब-कमेटी जुटी है
डिप्टी सीएम ने कहा है कि प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति लाएगी। प्रदेश सरकार की कैबिनेट सब-कमेटी इस पर काम कर रही है और इस समस्या का सर्वश्रेष्ठ हल तलाशा जाएगा। उप-मुख्यमंत्री के जवाब से संतुष्ट सुखराम चौधरी ने बाद में अपना संकल्प वापिस ले लिया।
