कांगड़ा। हिमाचल आर्थिक संकट से जूझ रहा है और राज्य सरकार कर्ज लेकर खर्च चला रही है। ऐसे माहौल में विधानसभा में सोमवार को एक घोषणा ने पूरे सदन को हैरान कर दिया। जोगिंद्रनगर से BJP विधायक प्रकाश राणा ने ऐलान किया कि जब तक प्रदेश आर्थिक संकट से उभर नहीं जाता, तब तक वह विधायक का पूरा वेतन छोड़ रहे हैं।
केवल 1 रुपए वेतन लेंगे MLA
MLA ने कहा कि इस संकट की घड़ी में वे केवल 1 रुपया वेतन ही लेंगे । जैसे ही राणा ने यह घोषणा की, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने मेज थपथपा कर उनका स्वागत किया। आर्थिक तंगी से कराह रहे हिमाचल में ये घोषणा राजनीतिक गलियारों में एक नई मिसाल बन गई है।
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“कर्ज लेकर कैसे लूं सैलरी?”
नियम 130 पर चर्चा के दौरान प्रकाश राणा ने कहा कि जब पूरा प्रदेश कर्ज़ के बोझ से दबा है, तब वेतन लेना उनके सिद्धांतों के खिलाफ है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार कर्ज लेकर वेतन देती है, मैं कर्ज का पैसा जेब में नहीं डाल सकता। उनके अनुसार यह व्यक्तिगत निर्णय है और वह चाहते हैं कि संकट के समय अधिक से अधिक पैसा विकास कार्यों पर खर्च हो।
सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने बजाई तालियां
राणा की घोषणा पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। संसदीय कार्य मंत्री ने भी राणा की सोच की खुलेआम तारीफ की। बता दें कि राणा लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। 2017 में वह निर्दलीय रूप से जीते थे और खाड़ी देशों में उनका सफल व्यवसाय है।
अमीर नेताओं में गिने जाते हैं राणा
बता दें कि BJP विधायक प्रकाश राणा प्रदेश के अमीर नेताओं में गिने जाते है। इनके अपने कई कारोबार है और बेहद ही खूबरसूरत बंगला भी है। जिसकी तस्वीरें भी वे सोशल मीडिया पर भी डालते नजर आते हैं।
हिमाचल की राजनीति में पहले भी बने उदाहरण
सिर्फ राणा ही नहीं, इससे पहले हिमाचल में कई बड़े नेता भी 1 रुपये वेतन लेने की मिसाल कायम कर चुके हैं।
- पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपने कार्यकाल में 1 रुपये वेतन लेते थे।
- पूर्व मंत्री विद्या स्टोक्स ने भी यही परंपरा निभाई।
- माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कोरोना काल में पूरे एक साल की सैलरी सीएम रिलीफ फंड में दान की थी।
राणा का फैसला इसी परंपरा को फिर से मजबूत करता हुआ नजर आ रहा है।
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विधायकों के वेतन-भत्तों में हाल ही में हुई थी 24% की बढ़ोतरी
दिलचस्प बात यह है कि सुक्खू सरकार ने इसी साल विधायकों के वेतन और भत्तों में 24% की बढ़ोतरी की थी वो भी पूरे 9 साल बाद। हालांकि BJP विधायक सतपाल सत्ती का कहना है कि एक्ट पास हुआ है, पर बढ़ा हुआ वेतन 7 महीने से अब तक मिला नहीं है।
वर्तमान प्रावधान के अनुसार
- विधायक का वेतन: 55,000 से बढ़कर 85,000
- क्षेत्र भत्ता: 1.20 लाख
- कार्यालय भत्ता: 90,000
- बैठक भत्ता: 1800 से बढ़कर 2500
- टैक्सी यात्रा सीमा: 4 लाख से बढ़कर 6 लाख रुपए सालाना
- सरकार ने बिजली, पानी और फोन बिल भत्ते भी समाप्त कर दिए हैं।
