शिमला। हिमाचल प्रदेश को नया राज्यपाल मिल गया है। मंगलवार को राजधानी शिमला के लोकभवन में आयोजित समारोह में कविंद्र गुप्ता ने राज्यपाल पद की शपथ ली। उन्हें शपथ हिमाचल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधवालिया ने दिलाई। राज्यपाल ने हिंदी में शपथ ग्रहण की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, मंत्रिमंडल के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। शपथ ग्रहण के साथ ही प्रदेश में नए राज्यपाल के कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत हो गई।
आरडीजी बहाली को लेकर दिया बड़ा संकेत
शपथ लेने के बाद राज्यपाल ने कहा कि वह प्रदेश के हितों के लिए केंद्र सरकार के समक्ष पैरवी करेंगे। वह केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच समन्वय स्थापित करेंगे। वहीं उन्होंने आरडीजी पर भी बड़ी बात कही। नए राज्यपाल ने कहा कि केंद्र के केई मंत्रियों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि वह केंद्र से हिमाचल की बंद हुई आरडीजी को लेकर बात करेंगे और उसे दोबारा बहाल करवाने का प्रयास करेंगे। उनके इस बयान को हिमाचल सरकार के लिए बड़ी राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
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सुक्खू सरकार को जगी नई उम्मीद
राज्यपाल के इस बयान के बाद प्रदेश की हिमाचल प्रदेश सरकार और खासकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार को लंबे समय बाद उम्मीद की किरण दिखाई दी है। माना जा रहा है कि यदि केंद्र स्तर पर सकारात्मक पहल होती है तो इससे प्रदेश के वित्तीय और विकास से जुड़े कई मुद्दों पर राहत मिल सकती है।
शपथ ग्रहण कार्यक्रम में नई शुरूआत
राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह से इस बार नई शुरूआत की गई। नए राज्यपाल ने शपथ ग्रहण समारोह में पहली बार छ छंदो वाला वंदे मातरम गाया। बता दें कि नए निर्देश के तहत अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य किया गया है। सभी लोगों को खड़े होकर इसका सम्मान करना होगा, जैसे राष्ट्रगान "जन गण मन" के समय होता है। हिमाचल में राजयपाल की शपथ समारोह से इस नई परंपरा की शुरू हुई।
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शिक्षा और युवाओं पर रहेगा विशेष फोकस
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में पहले से ही अग्रणी राज्य है और इसे और बेहतर बनाने की जरूरत है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
पर्यावरण, पर्यटन और जनजातीय विकास पर जोर
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही पर्यटन, विशेषकर धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। जनजातीय क्षेत्रों के विकास और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात भी उन्होंने प्रमुखता से कही।
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नशा मुक्त हिमाचल के लिए अभियान मजबूत करने की बात
राज्यपाल ने नशे के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए कहा कि इसे रोकने के लिए शिक्षा, जागरूकता और परामर्श जैसी पहल को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने युवाओं को खेल गतिविधियों और सकारात्मक कार्यक्रमों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
संविधान के अनुसार करेंगे कार्य
राज्यपाल ने कहा कि उनका पद पूरी तरह संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है और वे संविधान के दायरे में रहते हुए राज्य सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार, विपक्ष और समाज के सहयोग से हिमाचल प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
