मंडी। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों चुनावी माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। इस बीच जिला मंडी के बैहना वार्ड में नगर निकाय चुनाव से पहले बड़ा मोड़ सामने आया है। यहां भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों ने आपसी सहमति से चुनावी मैदान से हटने का संकेत दिया है। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों के इस फैसले के पीछे स्थानीय लोगों की एकजुटता और लगातार हो रही बैठकों की अहम भूमिका रही है।
सभी प्रत्याशियों पर नामांकन वापस लेने का दबाव!
दरअसल, यहां पिछले कुछ दिनों से बैहना क्षेत्र के ग्रामीण लगातार इकट्ठा होकर चर्चा कर रहे थे। इन बैठकों में एक ही मुद्दा प्रमुख था, क्षेत्र को नगर निगम से अलग कर फिर से पंचायत में शामिल किया जाए। स्थानीय लोगों का मानना है कि शहरी निकाय में शामिल होने के बाद उनकी मूलभूत जरूरतें और ग्रामीण पहचान प्रभावित हुई है।
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इसी कारण उन्होंने सभी प्रत्याशियों पर नामांकन वापस लेने का दबाव बनाया। जनता के दबाव और लगातार बैठकों के बाद सभी उम्मीदवार एकजुट हुए हैं, जिससे इस वार्ड में चुनाव टलने की संभावना बन गई है।
नगर निगम में शामिल किए जाने का विरोध
भाजपा के स्थानीय विधायक इंद्र सिंह गांधी ने भी स्वीकार किया कि बैहना मूल रूप से ग्रामीण क्षेत्र रहा है और पहले भी इसके नगर निगम में शामिल किए जाने का विरोध हुआ था। उन्होंने संकेत दिया कि यदि अन्य प्रत्याशी पीछे हटते हैं, तो भाजपा उम्मीदवार भी सहमति के आधार पर नामांकन वापस ले लेगा।
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वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रकाश चौधरी ने इस फैसले को जनता की भावना के अनुरूप बताया। उनका कहना है कि यदि सभी पक्ष एकमत हैं, तो कांग्रेस भी चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाएगी।
सामूहिक सहमति से लिया निर्णय
निर्दलीय उम्मीदवार कृष्ण भानु ने भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी दबाव में नहीं, बल्कि सामूहिक सहमति से लिया गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के अधिकांश लोग चाहते हैं कि बैहना को दोबारा पंचायत व्यवस्था में शामिल किया जाए, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्य हो सकें।
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औपचारिक रूप से नामांकन वापस लेंगे प्रत्याशी
अब इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें निर्धारित समय सीमा यानी दोपहर बाद 3 बजे पर टिकी हैं, जब प्रत्याशी औपचारिक रूप से अपने नामांकन वापस लेंगे। यदि ऐसा होता है, तो यह उदाहरण दिखाएगा कि कैसे एकजुट होकर ग्रामीण अपने क्षेत्र के भविष्य को लेकर बड़ा निर्णय ले सकते हैं।
