शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में आज शुक्रवार को डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने एक अहम बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में जिन लोगों ने संस्थानों की स्थापना के लिए अपनी भूमि सरकार को दान दी है, वह जमीन अब वापस नहीं होगी, भले ही भविष्य में वह संस्थान बंद ही क्यों न कर दिए जाएं।

भूमि को दोबारा लौटाना संभव नहीं

भाजपा विधायक दलीप ठाकुर ने यह सवाल सदन में उठाया था। इस पर जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थलों पर संस्थान बनाए गए हैं, वहां अब भवन और बुनियादी ढांचा खड़ा हो चुका है।

 

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ऐसे में भूमि को दोबारा लौटाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इन परिसरों का इस्तेमाल भविष्य में अन्य शैक्षणिक या सरकारी संस्थान खोलने के लिए किया जा सकता है।

सरकारी स्वामित्व में रहेगी जमीन

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने आगे जानकारी दी कि मौजूदा सरकार ने गुण-दोष का आकलन करते हुए अब तक 126 नए संस्थान खोले हैं। उनका कहना था कि प्रदेश "वेलफेयर स्टेट" है और यहां हर निर्णय जनता के हित को ध्यान में रखकर लिया जाता है।

 

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डिप्टी सीएम ने यह साफ कर दिया कि एक बार किसी संस्थान के लिए दी गई भूमि, चाहे वह संस्थान सक्रिय रहे या बंद हो जाए, स्थायी रूप से सरकारी स्वामित्व में रहेगी और उसका उपयोग जनहित में ही किया जाएगा।

सरकार की देखरेख में रहेगी सुरक्षित

डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि, जनता द्वारा सरकार को दी गई भूमि एक प्रकार से सामाजिक योगदान है और यह अब सरकार की देखरेख में सुरक्षित रहेगी। राज्य सरकार इसका उपयोग ऐसे कार्यों के लिए करेगी, जिनसे आने वाले समय में भी लोगों को लाभ मिल सके।

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