#राजनीति
August 29, 2025
सुक्खू सरकार ने राम भरोसे छोड़ा भरमौर, हजारों श्रद्धालु फंसे; नहीं मिल रहा खाना और पानी
विधायक जनकराज ने सुक्खू सरकार के दावों की खोली पोल किया यह आग्रह
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चंबा। हिमाचल प्रदेश का चंबा जिला में पिछले दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने जमकर कहर ढाया है। खासकर भरमौर क्षेत्र इस समय अपने इतिहास की सबसे भयंकर आपदा से गुजर रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन के चलते भरमौर क्षेत्र की सभी सड़कें जगह.जगह से ध्वस्त हो चुकी हैं और संचार व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा गई है। भरमौर और हड़सर में मणिमहेश यात्रा पर आए करीब आठ हजार श्रद्धालु फंसे हुए हैं, जिन्हें ना तो भोजन मिल रहा है और ना ही पीने का पानी। लोग खुले आसमान के नीचे जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सरकारी मदद अब तक उन तक नहीं पहुंच पाई है।
भरमौर के विधायक डॉ जनकराज ने भरमौर के बिगड़े हालात को लेकर सुक्खू सरकार पर तीख प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ भरमौर में हजारों की संख्या में लोग फंसे हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के मुखिया राजनीतिक कार्यक्रमों में शरीक होने के लिए प्रदेश से बाहर चले गए हैं। प्रदेश सरकार ने भरमौर को राम भरोसे छोड़ दिया है। यहां फंसे लोगों को ना तो खाना मिल पा रहा है और ना ही पीने के लिए पानी। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब बाहर से आए इन श्रद्धालुओं का गुस्सा भी फूटने लगा है।
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भरमौर से विधायक डॉ. जनकराज ने राज्य सरकार के साथ साथ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र पिछले चार दिनों से पूरी तरह देश.दुनिया से कट चुका है। न सड़क मार्ग चालू हैं, न मोबाइल नेटवर्क बहाल हुआ है, और न ही प्रशासन से कोई संवाद स्थापित हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि भरमौर में क्या हो रहा है, इसकी पक्की जानकारी तक नहीं मिल पा रही। जिला प्रशासन से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा और हजारों श्रद्धालु और स्थानीय लोग बेसहारा पड़े हुए हैं।
विधानक जनकराज ने साफ किया है कि सुक्खू सरकार हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने के दावे कर रही है, लेकिन अभी तक भरमौर में एक भी हेलीकॉप्टर सेवा शुरू नहीं हो पाई है। जो हेलीकॉप्टर वहां देखे जा रहे हैं, वे निजी कंपनियों के हैं। जनक राज ने सुक्खू सरकार से आग्रह किया है कि भरमौर में फंसे हजारों लोगों को निकालने के लिए सरकार को सेना और एनडीआरएफ की मदद लेनी चाहिए। लेकिन इसके उलट सरकार सिर्फ आश्वासन दे रही है, जमीनी स्तर पर कोई राहत नहीं दिख रही।
मणिमहेश यात्रा के दौरान भारी संख्या में उत्तर भारत सहित देश के अन्य हिस्सों से आए श्रद्धालु इस आपदा के बीच हड़सर, भरमौर और आसपास के क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। न तो उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सका है, और न ही उनके लिए जरूरी खाद्य सामग्री और पानी की व्यवस्था हो पाई है। स्थानीय लोग और कुछ समाजसेवी संगठन सीमित संसाधनों से मदद की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात भयावह बने हुए हैं।
इस भयावह आपदा के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री का रवैया भी सवालों के घेरे में है। जब पूरा भरमौर क्षेत्र त्राहि.त्राहि कर रहा है, हजारों श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक संकट में हैं, उस समय मुख्यमंत्री बिहार में राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। जनता में यह रोष साफ देखने को मिल रहा है कि जब राज्य का एक प्रमुख पर्यटक और धार्मिक क्षेत्र आपदा से जूझ रहा है, तब सरकार के मुखिया को ज़मीनी हालात का जायज़ा लेने के लिए खुद मौके पर होना चाहिए था।
डॉ जनकराज ने भरमौर क्षेत्र में कार्यरत पावर प्रोजेक्ट और अन्य निजी उद्योगों से आग्रह किया है कि इस संकट की घड़ी में मानवता का परिचय दें और राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि फंसे हुए लोगों को खाना, पानी और प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराना इस समय सबसे जरूरी है। सरकार से ज्यादा अब हमें आम लोगों और निजी संस्थाओं से उम्मीद है।
बता दें कि चंबा जिला में चल रही पवित्र मणिमहेश यात्रा इस बार श्रद्धालुओं की नाराजगी का कारण भी बन गई। सरकार की अव्यवस्थाओं पर सैकड़ों यात्री भरमौर पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठे हुए और यात्रा प्रबंधन की लापरवाही के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
मणिमहेश यात्रा मार्ग पर हुए भूस्खलन से भयंकर तबाही हुई है। 24 से 27 अगस्त तक सात मणिमहेश यात्रियों की मौत हो गई है। हड़सर से ऊपर भूस्खलन होने से यह जानें गई हैं। आठ श्रद्धालु घायल हो गए हैं, जबकि नौ अभी भी लापता हैं। मणिमहेश यात्रा पर गए करीब 8,000 श्रद्धालु अभी भी रास्ते में फंसे हैं।