शिमला। हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनावों ने सियासी पारे को चरम पर पहुंचा दिया है। हर वार्ड और हर सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है, लेकिन इस राजनीतिक हलचल के बीच सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने ही घर से उठ रही बगावत बन गई है। कांग्रेस के कई कार्यकर्ता और नेता पार्टी लाइन से हटकर आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय (आजाद) ताल ठोक दी है। इस बगावत ने पार्टी की चुनावी रणनीति को झटका दिया है और संगठन के भीतर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं। खासतौर पर कुछ नगर निगम क्षेत्रों में बागियों की मौजूदगी ने मुकाबले को और जटिल बना दिया है।

डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने तुरंत डैमेज कंट्रोल की रणनीति लागू कर दी है। एक तरफ पार्टी ने मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतार दिया है, जिन्हें बागी उम्मीदवारों को मनाने और उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं दूसरी तरफ अनुशासन का डंडा भी तैयार कर लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बागियों को दो टूक चेतावनी दे दी है कि उनके पास वापसी का यह आखिरी मौका है, उसके बाद उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

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सोलन और मंडी में बगावत की आग

सूत्रों के मुताबिक बगावत के सुर सबसे ज्यादा सोलन और मंडी नगर निगम के कुछ वार्डों में तेज हैं। यहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने संगठन के फैसलों को ठेंगा दिखाते हुए नामांकन दाखिल कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए कांग्रेस संगठन ने तुरंत डैमेज कंट्रोल मोड ऑन कर दिया है। बागियों को मनाने और उन्हें चुनाव मैदान से पीछे हटने के लिए वरिष्ठ मंत्रियों और विधायकों की फौज उतार दी गई है।

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विक्रमादित्य सहित इन मंत्रियों को सौंपी जिम्मेदारी

सोलन में बगावत को शांत करने की जिम्मेदारी वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल को सौंपी गई है, जबकि मंडी में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। इसके अलावा मंडी में जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर को भी बागियों से निरंतर संवाद करने की जिम्मेदारी दी गई है।

 

पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों और पदाधिकारियों को साफ निर्देश हैं कि किसी भी कीमत पर बागियों को मनाया जाए और पार्टी की एकजुटता सुनिश्चित की जाए। हालांकि राहत की बात यह है कि धर्मशाला और पालमपुर में फिलहाल बगावत जैसी स्थिति सामने नहीं आई है।

 

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प्रदेशाध्यक्ष की चेतावनी

एक तरफ जहां पार्टी मनाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अनुशासन का डंडा भी तैयार है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में चुनावी सरगर्मियों के बीच प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार ने आज बागियों को स्पष्ट और कड़ा संदेश जारी किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि पार्टी लाइन से हटकर चुनाव लड़ने वालों के लिए अब वापसी का यह आखिरी मौका है।

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विनय कुमार ने कहा कि संगठन किसी भी राजनीतिक दल में सर्वोच्च होता है और उसके निर्णयों का पालन करना हर कार्यकर्ता का प्राथमिक कर्तव्य है। जो लोग पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ जाकर संगठन को कमजोर करेंगे, उनके खिलाफ नियमों के तहत सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि नामांकन वापस लेने की तय समय सीमा के बाद कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

वफादारों को इनाम, अनुशासनहीनता पर चाबुक

चुनावी रणनीति को धार देने और हर पल की रिपोर्ट पर नजर रखने के लिए प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में एक अत्याधुनिक वॉर रूम स्थापित किया गया है। यह वॉर रूम पूरे चुनावी घटनाक्रम बागियों की गतिविधियों और मंत्रियों के डैमेज कंट्रोल प्रयासों पर पैनी नजर रख रहा है।

 

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प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी उन वफादार कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी, जो पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के समर्थन में दिन.रात काम कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं को भविष्य में संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर सम्मानित करने का ऐलान भी किया है। उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता नगर निगम, पंचायती राज और अन्य निकाय चुनावों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, उन्हें संगठन में विशेष सम्मान दिया जाएगा।

क्या सफल होगा डैमेज कंट्रोल

कांग्रेस ने इन चुनावों को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानते हुए व्यापक स्तर पर रणनीति बनाई है। सभी मंत्रियों, विधायकों, बोर्ड-निगमों के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन को अलग-अलग क्षेत्रों में चुनावी कमान सौंपी गई है। पार्टी स्तर पर लगातार संवाद जारी है और वरिष्ठ नेताओं को उम्मीद है कि अधिकांश बागी मान जाएंगे और पार्टी की 'सरकार और संगठन' की एकजुटता का संदेश जनता तक पहुंचेगा। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि क्या कड़क संदेश और मंत्रियों की मध्यस्थता बागियों के दिल पिघला पाएगी? या फिर यह बगावत कांग्रेस के 'अजेय' होने के दावों को कमजोर कर देगी? इसका फैसला आने वाले दिनों में ही होगा।

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