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May 6, 2026

हिमाचल में कैंसर मरीजों को नहीं मिल रही मुफ्त दवा : हिमकेयर-आयुष्मान कार्ड फेल- तीमारदार परेशान

सुक्खू सरकार ने किया मुफ्त इलाज का दावा, लेकिन मरीज बेहाल

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Himachal Cancer Patients Struggle Ayushman Card Him Care Free Treatment not available Sukhu Government

शिमला। हिमाचल प्रदेश में गरीब और मध्यम वर्ग के लिए राहत मानी जाने वाली स्वास्थ्य योजनाएं जमीनी स्तर पर लड़खड़ाती नजर आ रही हैं। पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज का दावा करने वाली हिमकेयर और आयुष्मान योजना का लाभ मरीजों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा।

कैंसर मरीजों को नहीं मिल रही मुफ्त दवा

हालत यह है कि कार्डधारकों को इलाज के दौरान जरूरी दवाइयां खुद ही बाजार से महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

राज्य के प्रमुख अस्पताल IGMC शिमला में यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है- खासकर कैंसर मरीजों के बीच नाराजगी साफ झलक रही है।

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तीमारदार हो रहे परेशान

अस्पताल में इलाज करवा रहे मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि जन औषधि केंद्रों पर सामान्य दवाइयां तो उपलब्ध हैं। मगर कीमोथैरेपी में इस्तेमाल होने वाली महंगी और जरूरी दवाइयां लंबे समय से स्टॉक में नहीं हैं। इससे मरीजों को मजबूरी में बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं, जो कई बार उनकी क्षमता से बाहर होती हैं।

हिमकेयर-आयुष्मान कार्ड फेल 

कागजों में देखें तो केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना और राज्य सरकार की हिमकेयर योजना के तहत हर पात्र परिवार को सालाना पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज का प्रावधान है। मगर हकीकत यह है कि अस्पतालों को समय पर भुगतान न मिलने के कारण यह व्यवस्था ठप सी हो गई है।

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अस्पतालों पर करोड़ों की देनदारी

सिर्फ IGMC शिमला में ही करीब 110 करोड़ रुपये की देनदारी सरकार पर बकाया बताई जा रही है। जबकि अन्य अस्पतालों में भी यह आंकड़ा करोड़ों में पहुंच चुका है।

इलाज पर पड़ रहा असर

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस वित्तीय दबाव का सीधा असर इलाज पर पड़ रहा है। डॉ. राहुल राव ने बताया कि करीब 70 करोड़ रुपये हिमकेयर और 40 करोड़ रुपये आयुष्मान योजना के तहत बकाया हैं।

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5-6 महीने से नहीं हुआ भुगतान

हिमकेयर में राज्य सरकार की ओर से आंशिक भुगतान मिल रहा है। मगर आयुष्मान योजना के तहत पिछले पांच-छह महीनों से कोई भुगतान नहीं हुआ है। यही कारण है कि अस्पतालों में महंगी दवाइयों की सप्लाई प्रभावित हो रही है।

कैंसर मरीजों की मुश्किलें बढ़ी

इस स्थिति ने खासकर कैंसर मरीजों के लिए मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इलाज के बीच में दवाइयों की कमी या महंगी खरीद मरीजों के लिए न सिर्फ आर्थिक, बल्कि मानसिक दबाव भी पैदा कर रही है। यही हाल अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों का भी है, जिन्हें मुफ्त इलाज की उम्मीद थी, लेकिन अब उन्हें जेब ढीली करनी पड़ रही है।

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कब मिलेगी मरीजों को सुविधा?

स्वास्थ्य योजनाओं के इस संकट ने सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बकाया भुगतान कब तक जारी होगा और क्या मरीजों को वाकई इन योजनाओं का पूरा लाभ मिल पाएगा या नहीं।

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