#राजनीति
August 1, 2026
हिमाचल भाजपा MLA 100 करोड़ तक की संपत्ति के मालिक, सुक्खू बोले- कहां से आया पैसा-जांच जरूरी
दिल्ली से लौटे सीएम सुक्खू ने कैबिनेट विस्तार और फेरबदल पर कही बड़ी बात
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चंबा। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ अहम बैठकों के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के तेवर पूरी तरह बदले नजर आए। राजधानी से सीधे चंबा पहुंचे मुख्यमंत्री ने विपक्ष द्वारा विजिलेंस कार्रवाई और भाजपा नेताओं पर FIR दर्ज कराने के आरोपों पर बेहद सख्त लहजे में जवाब दिया। इसके साथ ही उन्होंने बहुचर्चित कैबिनेट विस्तार और विभागों में फेरबदल को लेकर भी बड़ा बयान देकर राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में भाजपा के कई विधायक ऐसे हैं, जिनकी संपत्ति 50 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक बताई जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संपत्ति आखिर किन स्रोतों से अर्जित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सब कुछ नियमों के तहत हुआ है तो जांच से किसी को डरने की जरूरत नहीं है। सीएम सुक्खू ने कहा कि यह कोई राजनीतिक द्वेष का मामला नहीं, बल्कि जनता के सामने पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने का विषय है।
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उन्होंने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा, यदि किसी ने ईमानदारी और मेहनत से संपत्ति अर्जित की है, तो उसे डरने की कोई जरूरत नहीं है और न ही जनता के सामने ब्यौरा रखने में संकोच होना चाहिए। लेकिन अगर भ्रष्टाचार के जरिए बेहिसाब धन बटोरा गया है, तो उसकी जांच होगी और सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी।"
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। कुछ लोगों ने प्रदेश में भ्रष्टाचार को अपना धंधा बना लिया है, जिसे अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता के खून-पसीने की कमाई और सरकारी खजाने के पैसे पर पहला हक प्रदेश के गरीब, बेसहारा, जरूरतमंद लोगों और विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा का है। भ्रष्टाचार के जरिए बनाई गई संपत्तियों पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा और उस धन का इस्तेमाल केवल जनकल्याणकारी योजनाओं में होगा।
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दिल्ली दौरे में शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों का जिक्र करते हुए सीएम सुक्खू ने बताया कि हिमाचल मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि आलाकमान के साथ विस्तृत चर्चा हो चुकी है और एक अंतिम दौर की वार्ता के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। सरकार का मकसद केवल मंत्रियों की कुर्सियां भरना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक कसावट देना, जवाबदेह बनाना और जनहित के कामों को रफ्तार देना है। व्यापक जनहित और संगठन के हितों को ध्यान में रखकर ही विभागों का बंटवारा और फेरबदल किया जाएगा।
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राजनीतिक हलकों में चल रही तरह-तरह की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व उनकी सरकार की कार्यशैली और निर्णयों से पूरी तरह संतुष्ट है।
राहुल गांधी और प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल सहित पार्टी का शीर्ष नेतृत्व हिमाचल सरकार के कामकाज, जनहितैषी नीतियों और विकास कार्यों की लगातार समीक्षा कर रहा है और सरकार के फैसलों की सराहना कर रहा है। सीएम ने कहा कि सरकार पूरी मजबूती के साथ सुशासन और पारदर्शिता की राह पर आगे बढ़ती रहेगी।
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मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। भाजपा नेताओं की संपत्ति की जांच की मांग, एफआईआर को लेकर सरकार का रुख और कैबिनेट विस्तार के संकेतों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में सरकार कैबिनेट विस्तार और प्रशासनिक फेरबदल को लेकर क्या फैसला लेती है।