हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला में आज एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। जहां सिर्फ एक वोट के चलते कांग्रेस को बीडीसी चुनाव में अध्यक्ष पद की कुर्सी नसीब ना हो सकी। मामला हमीरपुर के बड़सर उपमंडल का है। यहां बिझड़ी ब्लाक विकास समिति (बीडीसी) के चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाना था। मगर यहां आखिरी वक्त में राजनीतिक समीकरण कुछ इस तरह से बदले कि भाजपा भी हैरान रह गई। 

किसके पास था कितना समर्थन - कैसे बदला खेल.. 

तो, पिछले तीन महीनों से बिझड़ी बीडीसी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव लटका हुआ था। इस दौरान भाजपा की तरफ से लगातार इस बात का दावा किया जा रहा था कि उनके पास कुल 18 सदस्यों का समर्थन है। इसी कारण से इस चुनाव लटकाया जा रहा है। 

 

यह भी पढ़ें: हिमाचल में बादल फटने से मची तबाही: फ्लैश फ्लड से 4 हाइड्रो प्रोजेक्ट को नुकसान; लोगों में मची अफरा तफरी 

 

बहरहाल, आज जब शनिवार को वोटिंग का दिन आया तो भाजपा का दावा बुरी तरह से फेल होता नजर आया। हालांकि, नतीजा फिर भी भाजपा के पक्ष में रहा और भाजपा के समर्थन वाले सिर्फ के वोट से जीतने में सफल हो गए। मगर इसमें चौंकाने वाली बात ये रही कि उन्हें केवल 12 सदस्यों का ही वोट हासिल हो सका और उनके विपक्ष में खड़े हुए राजेश मांगा 11 वोट पाकर भी चुनाव हार गए। 

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में अब नहीं चलेगी निजी स्कूल संचालकों की मनमानी, नियम तोड़े तो लगेगा एक लाख रुपए जुर्माना

कांग्रेस के लिए भी आई गुड न्यूज..

वहीं, अध्यक्ष पद के चुनाव में मुंह की खाने के बाद कांग्रेस के खेमे में संतोष इस बात का रहा कि उपाध्यक्ष पद की कुर्सी उनके खाते में आई। भाजपा समर्थित उम्मीदवार पंकज मांगा को कांग्रेस के सपोर्ट वाले पवन शर्मा ने ठीक उसी तरह से हराया जैसा अध्यक्ष पद की रेस में हुआ था। उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में 12 वोट पड़े और भाजपा उम्मीदवार 11 सदस्यों का समर्थन पाते हुए भी चुनाव हार गए। 

 

यह भी पढ़ें : विजिलेंस ने जमीन फर्जीवाड़े में धरा MLA सुधीर शर्मा का करीबी, 300 रजिस्ट्रियां- 400 कनाल जमीन...

पूर्व विधायकों के समर्थकों का था चुनाव - कांग्रेस ने चौंकाया 

आपको बता दें कि अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने वाले रमेश शर्मा भाजपा से सम्बन्ध रखने वाले पूर्व विधायक बलदेव शर्मा के खासम ख़ास लोगों में गिने जाते हैं। वहीं, उपाध्यक्ष पद की कुर्सी कब्जाने वाले पवन शर्मा कांग्रेस के पूर्व विधायक सुभाष डढवालिया के समर्थक हैं। ऐसे में इस चुनाव को दो राजनीतिक ध्रुवों के टकराव के रूप में देखा जा रहा था। 

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में दो लोगों की देह मिलने से मचा हड़कंप, एक खड्ड किनारे तो दूसरा ट्रक में पड़ा मिला

 

वहीं, ये चुनाव मुख्यमंत्री के गृह जिले से जुड़ा था इसलिए इसकी राजनीतिक अहमियत और अधिक बढ़ गई थी। हालांकि, चुनाव में हो रही देरी के बीच भाजपा की तरफ से जिन 18 सदस्यों का समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा था। वो दावा आखिर समय पर फुस्स साबित हुआ। वहीं, उपाध्यक्ष पद के चुनाव में जीते कांग्रेस समर्थित पवन शर्मा को तो सिर्फ 6 वोट ही मिलने वाले थे। मगर जब आखिर वक्त में उन्हें एक्स्ट्रा वोट पड़ गए, तो सभी की हैरत हुई और इसी बात ने अब इस चुनाव को चर्चाओं में ला दिया है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें