ऊना। हिमाचल प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के भीतर मचे घमासान ने अब एक बड़े गृहयुद्ध का रूप ले लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार करते हुए, ऊना जिला के दिग्गज नेताओं ने अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अख्तियार कर लिए हैं।
सीएम सुक्खू ने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया था कि पंचायती राज चुनाव में जिला परिषद वार्डों के लिए कांग्रेस किसी भी उम्मीदवार को अधिकृत रूप से मैदान में नहीं उतारेगी और मैदान को खुला छोड़ा जाएगा, ताकि कोई भी कार्यकर्ता चुनाव लड़ सके। लेकिन ऊना में मुख्यमंत्री के इस फैसले को हवा में उड़ाते हुए उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी गई है।
मुख्यमंत्री की ओपन फील्ड को अपनों ने ही नकारा
कांग्रेस संगठन के भीतर चल रही यह खींचतान उस समय सार्वजनिक हो गई, जब ऊना और कुटलैहड़ ब्लॉक कांग्रेस ने संगठन और सरकार के निर्देशों की परवाह किए बिना अपने-अपने क्षेत्रों से पार्टी समर्थित जिला परिषद उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि सीएम सुक्खू और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का मानना था कि चुनाव को दलीय आधार पर न लड़कर कार्यकर्ताओं को स्वतंत्र छोड़ना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर मनमुटाव न हो। लेकिन ऊना जिला में हुई इस घोषणा ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के अधिकार और प्रदेश अध्यक्ष की पकड़ को चुनौती दे दी है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में बदली परिवार की परिभाषा, सास-ससुर ने किया अवैध कब्जा- तो बहू भी नहीं लड़ पाएगी चुनाव
विधायक और पूर्व विधायक की मौजूदगी से गरमाया मामला
हैरानी की बात यह है कि अनुशासनहीनता के इस पूरे घटनाक्रम को किसी और ने नहीं, बल्कि खुद कांग्रेस के दिग्गज चेहरों ने हवा दी। उम्मीदवारों की इस घोषणा के समय कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा और ऊना के पूर्व विधायक व प्रदेश उपाध्यक्ष सतपाल रायजादा मंच पर मौजूद रहे। इन बड़े नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ़ कर दिया है कि जिला स्तर पर नेता अपनी ही सरकार और हाईकमान के फैसलों से इत्तेफाक नहीं रख रहे हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में 300 फीट गहरी खाई में जा गिरी, एक घर का बुझ गया चिराग; 26 साल थी उम्र
इन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा
- देहलां वार्ड: सोनिया राणा
- रायपुर सहोडा: प्रियंका शर्मा
- चताड़ा: दीक्षा सैनी
- धनेत: रीना देवी
- टक्का वार्ड: सुमित शर्मा
- लठियानी वार्ड: सत्या देवी
परंपरा का दिया हवाला
विधायक विवेक शर्मा और पूर्व विधायक सतपाल रायजादा ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि पंचायती राज चुनावों में हमेशा से पार्टी समर्थित उम्मीदवार उतरते रहे हैं और वे इसी पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं। हालांकि सियासी गलियारों में इसे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सुक्खू के निर्देशों पर किया गया वार माना जा रहा है। रायजादा ने कार्यकर्ताओं से इन प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने का आह्वान कर यह संदेश दे दिया है कि उनके लिए ब्लॉक कमेटी का फैसला सरकार के फरमान से ऊपर है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: गहरी नींद में सो रहे थे प्रोजेक्ट कर्मचारी, अचानक दहक उठा शेड; दो मजदूर जिं*दा ज..ले
संगठनात्मक एकता पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम ने हिमाचल कांग्रेस की संगठनात्मक एकता की कलई खोलकर रख दी है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री सभी कार्यकर्ताओं को मौका देने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके ही विधायक गुटबाजी को बढ़ावा देकर चुनावी मैदान में अपने पसंदीदा चेहरे उतार रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शिमला में बैठी सरकार और संगठन इस खुली चुनौती पर क्या एक्शन लेता है, या फिर ऊना का यह बगावती मॉडल पूरे प्रदेश में कांग्रेस के अनुशासन की चूलें हिला देगा।
