शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आखिरी दिन कई बड़े फैसलों और तीखी राजनीतिक बहस का गवाह बना। सदन में सरकार और विपक्ष के बीच उस समय जोरदार टकराव देखने को मिला, जब सुक्खू सरकार ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 और भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 को विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद पारित कर दिया। दोनों विधेयकों के पारित होने के बाद अब इन्हें राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

ससुर ने कब्जाई सरकारी जमीन तो बहू भी नहीं लड़ पाएगी चुनाव

हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 में परिवार की परिभाषा में बदलाव किया गया है। सरकार के मुताबिक पहले ऐसी स्थिति में अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति के बेटे के चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती थी, लेकिन बहू चुनाव लड़ सकती थी। अब संशोधन के बाद अतिक्रमण करने वाले परिवार की बहू को भी अयोग्यता के दायरे में लाया गया है। विधानसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

 

यह भी पढ़ें : पेंशनरों के बकाये और यूनिवर्सिटी बिल पर सदन में हंगामा, CM सुक्खू और जयराम के बीच तीखी नोकझोंक

BJP ने घेरा- ससुर के कब्जे की सजा बहू को क्यों?

भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने बिल का विरोध करते हुए सवाल उठाया कि बहू शादी के बाद दूसरे परिवार से आती है। यदि ससुर ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया था तो उस समय बहू उस परिवार का हिस्सा भी नहीं थी, फिर उसे चुनाव लड़ने से रोकने का क्या आधार है? उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रावधान के जरिए किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाया जा रहा है।

मंत्री अनिरुद्ध सिंह का पलटवार- अतिक्रमण करने वालों को फायदा क्यों?

ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भाजपा के विरोध पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी परिवार के सदस्य ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है तो उस परिवार को चुनावी व्यवस्था में उसका लाभ नहीं मिलना चाहिए। मंत्री ने सवाल किया कि अतिक्रमण करने वाला व्यक्ति खुद चुनाव नहीं लड़ सकता तो क्या वह परिवार के दूसरे सदस्यों को आगे करके चुनाव लड़वाए?

 

यह भी पढ़ें : पेपर लीक-नकल पर विधानसभा में गरजे CM सुक्खू, बोले; दोषी कोई भी हो- सलाखों के पीछे जाएगा

 

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सरकार ने कानूनी राय लेने के बाद ही यह संशोधन किया है और उद्देश्य पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू करना है। इसी बहस के बीच विपक्ष के विरोध के बावजूद विधेयक सदन में पारित हो गया।

स्टांप ड्यूटी पर भी बड़ा फैसला, प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने के नियम बदले

पंचायती राज विधेयक के साथ विधानसभा ने भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 भी पारित कर दिया। सरकार ने स्टांप शुल्क की विभिन्न दरों में बदलाव किया है। संशोधन के मुताबिक महिलाओं को एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर चार फीसदी स्टांप ड्यूटी देनी होगी। एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर महिलाओं और अन्य खरीदारों के लिए आठ फीसदी शुल्क रहेगा। पुरुष और अन्य खरीदारों के लिए 40 लाख रुपये तक की संपत्ति पर छह फीसदी और इससे अधिक पर आठ फीसदी स्टांप ड्यूटी का प्रावधान किया गया है।

 

यह भी पढ़ें : Breaking : कांग्रेस विधायक अनुराधा राणा को हुआ स्वाइन फ्लू, दो दिन पहले CM भी मिले थे

 

हिमाचल से बाहर के लोगों के लिए भी शुल्क का प्रावधान कड़ा किया गया है। धारा 118 के तहत सरकार की अनुमति से संपत्ति का हस्तांतरण या पट्टा लेने वाले बाहरी व्यक्तियों के लिए स्टांप ड्यूटी 12 फीसदी होगी। वहीं कुछ पावर ऑफ अटॉर्नी मामलों में सामान्य स्टांप शुल्क से 100 गुना तक शुल्क लेने का प्रावधान किया गया है।

जयराम बोले- स्टांप ड्यूटी बढ़ी तो आम आदमी की मुश्किल बढ़ेगी

स्टांप ड्यूटी संशोधन पर भी भाजपा ने सरकार को घेरा। जयराम ठाकुर ने कहा कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि स्टांप ड्यूटी बढ़ाकर आम लोगों पर बोझ डाल दिया जाए। उन्होंने दावा किया कि कई प्रावधानों में शुल्क काफी बढ़ाया गया है और इससे प्रदेश में संपत्ति की खरीद-बिक्री प्रभावित हो सकती है।
जयराम ने सरकार से बिल पर दोबारा विचार करने की मांग करते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि ज्यादा शुल्क के कारण प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन ही कम हो जाएं।

 

यह भी पढ़ें :  14 साल की किशोरी को होटल ले गया युवक, 6 दिन तक की निचता

CM बोले- महिलाओं के नाम संपत्ति बढ़ाने के लिए चार फीसदी शुल्क

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्टांप ड्यूटी में महिलाओं के लिए राहत को सरकार का महत्वपूर्ण फैसला बताया। उन्होंने कहा कि एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति महिलाओं के नाम खरीदने पर चार फीसदी स्टांप ड्यूटी का प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि महिलाओं के नाम पर अधिक संपत्ति खरीदी जाए। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

 

यह भी पढ़ें :  बुजुर्ग मरीज को ऑक्सीजन में देरी, मदद मांगने पर नर्स ने परिजनों को दिया धक्का- व्यवस्था पर उठे सवाल

मानसून सत्र के आखिरी दिन सरकार के दो बड़े फैसले

विधानसभा के आखिरी दिन दोनों विधेयकों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। एक तरफ ससुर के सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की स्थिति में बहू को भी पंचायत चुनाव से बाहर करने वाला प्रावधान चर्चा में रहा, तो दूसरी तरफ स्टांप ड्यूटी में बदलाव को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने रहे। भाजपा ने जहां दोनों फैसलों के कानूनी और व्यावहारिक असर पर सवाल उठाए, वहीं सुक्खू सरकार ने इन्हें व्यवस्था में सुधार और राजस्व व्यवस्था को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप बनाने वाला कदम बताया। अब दोनों विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून का रूप ले सकेंगे।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें