कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनावों की रणभेरी बजते ही राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। सूबे की सत्ता पर काबिज कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा दोनों ही इन चुनावों को जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। इसी बीच कुल्लू जिला के बंजार में एक गंभीर चुनावी विवाद सामने आया है, जिसने सियासी माहौल को और गरमा दिया है। यहां कांग्रेस के एक प्रत्याशी पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र जमा करने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसे लेकर अब भाजपा ने सीधे चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है।

बंजार के वार्ड नंबर 5 से शुरू हुआ विवाद

बंजार के भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने नगर पंचायत बंजार के वार्ड नंबर 5 से कांग्रेस उम्मीदवार रोशन लाल पर निशाना साधा है। शौरी का आरोप है कि रोशन लाल ने नामांकन के दौरान साल 1989 का एक ऐसा जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है जो पूरी तरह फर्जी है। भाजपा का दावा है कि उनके प्रत्याशी ठाकुर चंद ने इस संबंध में एसडीएम बंजार के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी और साक्ष्य भी पेश किए थेए लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

 

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निष्पक्ष चुनाव के लिए एसडीएम को हटाए

विधायक सुरेंद्र शौरी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि एसडीएम कार्यालय में ही प्रमाण पत्र से जुड़े साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। भाजपा का आरोप है कि प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से चुनाव की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लग गया है। इसी के चलते अब भाजपा ने चुनाव आयोग का रुख किया है। 

 

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चुनाव आयोग के पास पहुंची भाजपा

जब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भाजपा ने अब चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने न केवल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, बल्कि एसडीएम बंजार को तत्काल प्रभाव से हटाने की भी अपील की है, ताकि मतदान प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रह सके। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि इस तरह की शिकायतों को नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चुनाव की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा। उनका आरोप है कि प्रशासन की निष्क्रियता से गलत परंपरा को बढ़ावा मिल सकता है।

 

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कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार

विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं और आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है। निकाय चुनाव के इस अहम दौर में कुल्लू का यह मामला चुनावी पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर रहा है। अब सबकी नजर चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी है, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

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