धर्मशाला।  हिमाचल प्रदेश की राजनीति में धर्मशाला विधायक सुधीर शर्मा का सियासी चक्रव्यूह लगातार कांग्रेस के लिए अभेद्य साबित हो रहा है। लोकसभा चुनाव हो, विधानसभा उपचुनाव हो या फिर धर्मशाला नगर निगम की सियासी जंग, हर मोर्चे पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। अब नगर निगम धर्मशाला में मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों पर भाजपा की जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि धर्मशाला की राजनीति में सुधीर शर्मा का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

 

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सुधीर शर्मा की रणनीति और संगठनात्मक पकड़ के सामने कांग्रेस लगातार बैकफुट पर नजर आ रही है। उपचुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव और अब नगर निगम के शीर्ष पदों तक भाजपा की जीत को कांग्रेस पर एक और बड़ा सियासी प्रहार माना जा रहा है, जिसने धर्मशाला में पार्टी की स्थिति को और कमजोर कर दिया है। बुधवार को हुए चुनाव में वार्ड नंबर-2 से निर्वाचित पार्षद शमशेर नेहरिया मेयर चुने गए, जबकि वार्ड नंबर-8 की पार्षद प्रेरणा गुलेरिया डिप्टी मेयर निर्वाचित हुईं। चुनाव परिणाम सामने आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

धर्मशाला नगर निगम में भाजपा का दबदबा कायम

17 वार्डों वाली नगर निगम धर्मशाला में भाजपा ने हालिया चुनावों में 11 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। कांग्रेस पांच सीटों तक सिमट गई थी, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई थी। इसी बहुमत के आधार पर भाजपा ने मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पद अपने नाम कर लिए। चुनाव प्रक्रिया के दौरान भाजपा के सभी पार्षद एकजुट नजर आए। धर्मशाला विधायक सुधीर शर्मा भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थे और पार्टी की रणनीति में सक्रिय भूमिका निभाते दिखाई दिए।

 

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कांग्रेस छोड़ने के बाद लगातार मजबूत हो रहे सुधीर शर्मा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस से अलग होकर भाजपा में शामिल होने के बाद सुधीर शर्मा ने धर्मशाला क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत की है। विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद अब नगर निगम में भाजपा की सफलता को भी उनके प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। धर्मशाला नगर निगम के शीर्ष पदों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत को कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब नगर निगम क्षेत्र में कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही थी।

अतिक्रमण विवादों के बीच भी भाजपा ने बनाई बढ़त

नगर निगम चुनाव के बाद भाजपा के कुछ पार्षदों के खिलाफ सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण की शिकायतें सामने आई थीं। इनमें नवनिर्वाचित मेयर शमशेर नेहरिया का नाम भी चर्चा में रहा। प्रशासन द्वारा इन शिकायतों की जांच कर रिपोर्ट सरकार को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन मामलों में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और जांच प्रक्रिया जारी है। इन विवादों के बावजूद भाजपा ने अपने बहुमत को बरकरार रखते हुए निगम के दोनों प्रमुख पदों पर जीत हासिल कर राजनीतिक बढ़त बनाए रखी।

 

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कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ी सियासी तल्खी

नगर निगम की राजनीति में अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। जहां भाजपा के कुछ पार्षद जांच के दायरे में हैं, वहीं भाजपा ने भी कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं और पार्षदों पर सरकारी भूमि पर कब्जे के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। इस कारण धर्मशाला नगर निगम का राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

 

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नई टीम के सामने विकास की बड़ी जिम्मेदारी

राजनीतिक जीत के बाद अब नगर निगम की नई टीम के सामने शहर के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दे हैं। धर्मशाला में पार्किंग की समस्या, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल सुविधाएं और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को गति देना नई नेतृत्व टीम की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। पर्यटन राजधानी के रूप में पहचान रखने वाले धर्मशाला शहर में नागरिकों की अपेक्षाएं भी काफी अधिक हैं। ऐसे में मेयर शमशेर नेहरिया और डिप्टी मेयर प्रेरणा गुलेरिया के नेतृत्व में नगर निगम का प्रदर्शन आने वाले समय में चर्चा का विषय रहेगा।

 

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भाजपा के लिए मनोबल बढ़ाने वाली जीत

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नगर निगम धर्मशाला में मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में मिली सफलता भाजपा के लिए मनोबल बढ़ाने वाली है। वहीं इसे सुधीर शर्मा के प्रभाव वाले क्षेत्र में भाजपा की संगठनात्मक मजबूती के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल धर्मशाला को नया नेतृत्व मिल चुका है और अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजनीतिक जीत को विकास कार्यों में किस तरह बदला जाता है।

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