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July 1, 2026
ऑरेंट अलर्ट पर हिमाचल: मानसून के पहले ही दिन फटा बादल, पुल बहा; 44 सड़कें हो गई बंद
प्रदेश के चार जिलों में मानसून की एंट्री ने मचाई तबाही, कई पंचायतों के संपर्क कटे
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार जोरदार दस्तक दे दी है, लेकिन जिस बारिश का लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, उसने आते ही तबाही का मंजर भी दिखा दिया। कहीं बादल फटने की घटनाएं सामने आईं, कहीं भूस्खलन ने सड़कों पर वाहनों की रफ्तार रोक दी, कहीं पुल टूट गया तो कहीं घरों में मलबा घुस गया। मानसून के पहुंचते ही प्रदेश की 44 सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि एक महिला की जान चली गई है। कई क्षेत्रों में संपर्क मार्ग बाधित होने से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 44 सड़कें बंद हैं और 254 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं। सबसे अधिक असर मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और चंबा जिलों में देखने को मिला है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
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इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य समय से लगभग पांच दिन की देरी से हिमाचल प्रदेश पहुंचा है। मंगलवार को किन्नौर, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी और शिमला के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय हो गया। वहीं कांगड़ा और सिरमौर के कई इलाकों तक भी इसकी पहुंच हो चुकी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों के भीतर चंबा, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और सोलन सहित पूरे प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा।

मानसून की पहली बारिश का सबसे दुखद असर मंडी जिले में देखने को मिला। औट के समीप शनि मंदिर के पास पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आने से नालागढ़ निवासी एक महिला की मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम में पहाड़ों के नीचे वाहन खड़े न करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। धर्मपुर क्षेत्र में लगातार बारिश के चलते सिद्धपुर-धर्मपुर सड़क और धर्मपुर-जोगिंद्रनगर मार्ग कई स्थानों पर बाधित रहे। बल्ह घाटी में जलभराव से खेतों में पानी भर गया, जबकि गोहर क्षेत्र में टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचने की सूचना है।
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चंबा जिले में लगातार बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। पंगोला नाले के पास भारी मलबा और चट्टानें गिरने से चंबा-तीसा मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। इसके चलते करीब 25 पंचायतों का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ। तीसा, बैरागढ़, सनवाल, बौंदेड़ी, खजुआ, बिहाली, देवीकोठी, सेईकोठी और झज्जाकोठी सहित कई क्षेत्रों के लोगों को घंटों सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा।
सलूणी उपमंडल की लनोट पंचायत में अचानक भारी मलबा और बारिश का पानी घरों में घुस गया। दो मकानों को नुकसान पहुंचा, जबकि एक मकान में दरारें आ गईं। स्थानीय लोगों ने हालात को बादल फटने जैसी स्थिति बताया।
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शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के गानवी क्षेत्र में तेज बारिश के कारण एक अस्थायी पुल बह गया। इससे तीन पंचायतों का संपर्क प्रभावित हो गया और लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। राजधानी शिमला में भी चक्कर बाइपास और चक्कर बाइफरकेशन क्षेत्र में बारिश के बाद मलबा सड़क पर आने से यातायात प्रभावित रहा। लोक निर्माण विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर सड़क को बहाल किया।
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लाहौल-स्पीति जिले के जिस्पा क्षेत्र में बादल फटने की घटना के बाद लेह-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात ठप हो गया। कई वाहन रास्ते में फंस गए और प्रशासन को सुरक्षा के मद्देनजर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। जाहलमा नाले में आई फ्लैश फ्लड से सड़क का हिस्सा बह गया। पर्यटक, स्थानीय लोग और एक बारात तक पूरी रात फंसी रही।

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अगले दिन सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने अस्थायी व्यवस्था बनाकर दूल्हा-दुल्हन और बारातियों को सुरक्षित नाला पार करवाया। बारिश और बाढ़ का असर किसानों पर भी पड़ा है। कई क्षेत्रों में मटर और गोभी जैसी नगदी फसलें फंस गई हैं, जबकि कुछ जगहों पर फसलें बाढ़ की चपेट में आकर नुकसानग्रस्त हुई हैं।
कुल्लू जिले में मनाली-काजा राष्ट्रीय राजमार्ग-505 चिचोंग-खोलकसा के पास बंद हो गया। पानी निकासी का कलवर्ट अवरुद्ध होने से सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। लगातार बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ पिघलने के कारण नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
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मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 2 से 4 जुलाई तक कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, शिमला और सिरमौर में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, जलभराव और नदी-नालों के उफान पर आने की आशंका भी व्यक्त की गई है। मौसम विभाग ने साफ कहा है कि अगले चार दिन संवेदनशील रहेंगे और लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
जहां कई जिलों में बारिश आफत बनकर आई है, वहीं कांगड़ा सहित कई कृषि क्षेत्रों में यह राहत और उम्मीद लेकर भी आई है। धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में हुई अच्छी बारिश से धान की रोपाई को गति मिली है। पिछले कई दिनों से बारिश की कमी के कारण प्रभावित हो रही खेती को इससे बड़ा सहारा मिला है। किसानों का कहना है कि खेतों में पर्याप्त नमी आने से धान की रोपाई का कार्य तेज हो गया है, जिससे इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी है।
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प्रदेशभर में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने से बचें, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा न करें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। ऊना जिले में एहतियात के तौर पर स्कूलों के समय में भी बदलाव किया गया है। मानसून की पहली ही बारिश ने साफ संकेत दे दिया है कि इस बार बरसात का मौसम चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। ऐसे में प्रशासन और आम लोगों दोनों को सतर्कता बरतनी होगी।