नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में त्रि.स्तरीय पंचायती राज चुनावों के दूसरे चरण का मतदान आज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। पोलिंग बूथों पर वोटिंग खत्म होने के तुरंत बाद अब नतीजे घोषित हो रहे हैं। इस सब के बीच सबसे बड़े जिला कांगड़ा से एक ऐसा चुनावी नतीजा सामने आया जिसने पूरे राजनीतिक हलके और आम जनता को हैरान कर दिया है।

लगातार 7वीं बार बनी प्रधान

आज के इस आधुनिक दौर में, जहां जनता जनार्दन बेहद जागरूक है और अमूमन एक या दो साल में ही अपने पंचायत प्रतिनिधियों के काम से ऊबकर नया प्रधान या उपप्रधान चुन लेती है, वहीं कांगड़ा के नगरोटा बगवां विकास खंड की ग्राम पंचायत सरूट की जनता ने इतिहास रच दिया है।

 

यहां की कद्दावर महिला नेत्री अल्पना शर्मा ने तमाम राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त करते हुए लगातार 7वीं बार प्रधान पद का चुनाव जीतकर अपनी बादशाहत साबित की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 124 मतों के अंतर से करारी शिकस्त देकर यह महा.रिकॉर्ड अपने नाम किया। अल्पना शर्मा पहले चरण के पंचायत चुनाव में 7वीं बार प्रधान बनी है।

 

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1995 से शुरू हुआ था सफर, 2005 में चुनी गई थीं निर्विरोध

अल्पना शर्मा के इस अजेय राजनीतिक सफर की शुरुआत आज से करीब तीन दशक पहले वर्ष 1995 में हुई थी, जब उन्होंने पहली बार महिला आरक्षित सीट से चुनावी मैदान में कदम रखा था। उस पहली जीत के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 

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जनता के बीच उनकी लोकप्रियता का आलम यह रहा कि वर्ष 2005 के पंचायत चुनाव में सरूट की जनता ने बिना किसी विरोध के उन्हें 'निर्विरोध' अपना प्रधान चुन लिया था। बीते 30 वर्षों से लगातार जीत का परचम लहराना यह साफ करता है कि उनका जनता से रिश्ता महज एक जनप्रतिनिधि का नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसा है।

रीढ़ की हड्डी टूटी, पर हौसला नहीं

इस ऐतिहासिक जीत के बाद भावुक हुईं अल्पना शर्मा ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय सरूट पंचायत की देवतुल्य जनता के अपार स्नेह और आशीर्वाद को दिया। उन्होंने अपनी सेवा यात्रा का एक बेहद मार्मिक संस्मरण साझा करते हुए बताया कि एक समय जीवन में ऐसा मोड़ भी आया था जब एक भयानक दुर्घटना के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी (स्पाइन फ्रैक्चर) टूट गई थी।

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"शारीरिक रूप से उस असहनीय दर्द और लाचारी के दौर में भी मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी। व्हीलचेयर और बेड पर होने के बावजूद मेरा ध्यान हमेशा अपनी पंचायत के विकास कार्यों और लोगों की समस्याओं को सुलझाने पर रहा। उनकी इसी अडिग सेवा भावना और ईमानदारी को देखते हुए ग्रामीणों ने इस बार भी उन पर आंख मूंदकर भरोसा जताया।

विकास और निष्ठा की राजनीति को प्राथमिकता

अल्पना शर्मा ने परिणाम घोषित होने के बाद स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति का एकमात्र मकसद सरूट गांव का चहुंमुखी विकास और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जिस निष्ठा और पारदर्शिता के साथ उन्होंने पिछले 30  साल काम किया है, आगामी कार्यकाल में भी वह जनता की सेवा को ही अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए रखेंगी। आज के बदलते दौर में अल्पना शर्मा की यह लगातार 7वीं जीत हिमाचल की राजनीति में शोध का विषय बन गई है।

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