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June 30, 2026
सुक्खू सरकार पर बरसे अनुराग: बोले- अध्यक्ष चुनाव लटका रही कांग्रेस, चल रहा खरीद-फरोख्त का खेल
भाजपा पार्षदों पर दर्ज हो रहे झूठे मामले, दबाव की राजनीति पर उतरी सुक्खू सरकार
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ऊना। हिमाचल प्रदेश में नगर निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों के बाद अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि निकाय चुनावों में जनता का पूरा समर्थन न मिलने के बाद अब सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
ऊना में देश में लगाए गए आपातकाल की बरसी के मौके पर अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनावों को जानबूझकर उलझाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां भाजपा को बहुमत मिला है, वहां चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में उसकी कार्यप्रणाली बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव में खरीद-फरोख्त की राजनीति की जा रही है और निर्वाचित प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के कई पार्षदों और जनप्रतिनिधियों को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि चुनावी गणित बदला जा सके। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कुछ पार्षदों के खिलाफ अचानक शिकायतें सामने आ रही हैं और उन पर कार्रवाई की तलवार लटकाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को डराने और राजनीतिक रूप से कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। अनुराग ने कहा कि यदि किसी मामले में कानूनी प्रक्रिया अपनानी है तो वह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, लेकिन केवल राजनीतिक लाभ के लिए कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता।
सांसद ने कहा कि प्रदेश सरकार का पूरा ध्यान जनहित के मुद्दों से हटकर राजनीतिक प्रबंधन में लगा हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आग्रह किया कि वे राजनीतिक जोड़-तोड़ छोड़कर जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा करने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग रोजगार, विकास, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान चाहते हैं, लेकिन सरकार इन विषयों पर अपेक्षित परिणाम देने में सफल नहीं हो रही है।
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अनुराग ठाकुर ने प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं, किसानों और छोटे उद्योगों पर लगातार नए-नए सेस और शुल्क लगाए जा रहे हैं, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका कहना था कि सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए जनता पर बोझ डालने के बजाय विकास और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहिए।
आपातकाल की बरसी के अवसर पर बोलते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना हर सरकार की जिम्मेदारी होती है और किसी भी प्रकार की राजनीतिक दबाव की संस्कृति लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
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प्रदेश में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनावों को लेकर पहले से ही राजनीतिक सरगर्मी बनी हुई है। कई स्थानों पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद और कानूनी चुनौतियां सामने आ चुकी हैं। ऐसे में अनुराग ठाकुर के ताजा बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।