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June 30, 2026

धर्मशाला MC: मेयर चुनाव से पहले तीन BJP पार्षदों पर अतिक्रमण का डंडा, कांग्रेस बिगाड़ सकती है समीकरण!

तीन बीजेपी पार्षदों पर अतिक्रमण के आरोप डीसी ने कार्रवाई के लिए भेजा पत्र

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Dharamshala Municipal Corporation

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में चार नगर निगमों में से तीन पर पूर्ण बहुमत हासिल करने वाली भाजपा के सामने सोलन के बाद अब धर्मशाला में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। सोलन में दो भाजपा पार्षदों पर अतिक्रमण के आरोप लगने के बाद अब धर्मशाला में भाजपा पार्षदों पर अतिक्रमण की जांच शुरू हो गई है। नगर निगम धर्मशाला के तीन नवनिर्वाचित भाजपा पार्षदों पर सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के आरोप लगे हैं और प्रारंभिक जांच में आरोपों को लेकर तथ्य सामने आने के बाद मामला सरकार तक पहुंच गया है।

 

यदि आगामी जांच और कानूनी प्रक्रिया में इन पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो धर्मशाला नगर निगम में भाजपा का बहुमत प्रभावित हो सकता है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम से सबसे अधिक राजनीतिक लाभ लेने की तैयारी में है।

मेयर चुनाव से पहले भाजपा के सामने नई चुनौती

धर्मशाला नगर निगम में कुल 17 वार्ड हैं। इनमें भाजपा के 11, कांग्रेस के 5 और एक निर्दलीय पार्षद चुना गया है। संख्या बल के आधार पर भाजपा मेयर और डिप्टी मेयर पद पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही थी। हालांकि मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से ठीक पहले तीन भाजपा पार्षदों पर लगे अतिक्रमण के आरोपों ने समीकरण बदलने शुरू कर दिए हैं। यदि इन पार्षदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई होती है तो भाजपा का आंकड़ा सीधे 11 से घटकर 8 तक पहुंच सकता है, जिससे नगर निगम की राजनीति में बड़ा उलटफेर संभव है।

मेयर चुनाव से पहले अतिक्रमण के फेर में फंसे तीन बीजेपी पार्षद

बता दें कि 29 जून को कोरम पूरा ना होने के चलते धर्मशाला नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव लटक गया था। अब यह चुनाव कल यानी पहली जुलाई को होना है। लेकिन उससे पहले ही भाजपा के तीन पार्षदो पर अतिक्रमण के आरोप लग गए हैं। अब कल के चुनाव पर सभी की नजरें रहेंगी। कल की बैठक में कांग्रेस पार्षद शामिल होते हैं या नहीं इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

 

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शपथ के बाद नहीं हो पाया मेयर चुनाव

हाल ही में धर्मशाला नगर निगम के नवनिर्वाचित पार्षदों ने शपथ ग्रहण की थी। इसके बाद मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव प्रस्तावित था, लेकिन कांग्रेस पार्षदों के बैठक में शामिल न होने के कारण कोरम पूरा नहीं हो सका और चुनाव टालना पड़ा। अब यह चुनाव एक जुलाई को प्रस्तावित है, लेकिन उससे पहले अतिक्रमण विवाद ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।

तीन पार्षदों पर क्या हैं आरोप?

शिकायतों के आधार पर प्रशासन द्वारा करवाई गई जांच में तीन पार्षदों के खिलाफ सरकारी भूमि से जुड़े मामले सामने आए हैं। वार्ड नंबर-2 भागसूनाग से निर्वाचित पार्षद शमशेर सिंह नेहरिया पर आरोप है कि उन्होंने होटल के समीप वन विभाग की भूमि पर कंक्रीट स्लैब डालकर पार्किंग विकसित की। वार्ड नंबर-15 के पार्षद प्रवीण कुमार पर सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण करने का आरोप लगाया गया है। वहीं वार्ड नंबर-17 सिद्धपुर से निर्वाचित पार्षद विशाल जम्वाल के नाम से कथित तौर पर एक अवैध दुकान में वर्षों से बिजली कनेक्शन चलने का मामला जांच के दायरे में आया है।

 

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उपायुक्त ने सरकार को भेजी रिपोर्ट

मामले की जांच एसडीएम धर्मशाला के माध्यम से राजस्व अधिकारियों से करवाई गई। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उपायुक्त कांगड़ा ने 24 जून को शहरी विकास विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है। अब अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है। सरकार किसी अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति कर मामले की विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।

अयोग्यता तक पहुंच सकता है मामला

हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 8(एल) के अनुसार यदि कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि या उसका कानूनी वारिस सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का दोषी या उससे लाभान्वित पाया जाता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इतना ही नहीं, अतिक्रमण हटाए जाने के बाद भी छह वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। इसी कारण यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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कांग्रेस की रणनीति पर भी उठ रहे सवाल

धर्मशाला में मेयर चुनाव से पहले जिस तरह कांग्रेस पार्षदों ने बैठक से दूरी बनाई और अब अतिक्रमण के मामलों ने तूल पकड़ लिया है, उसे लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। भाजपा समर्थकों का मानना है कि कांग्रेस सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाकर नगर निगम में सत्ता संतुलन बदलने की कोशिश कर सकता है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

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सोलन में भी भाजपा के पार्षदों पर जांच

दिलचस्प बात यह है कि केवल धर्मशाला ही नहीं, बल्कि सोलन नगर निगम में भी भाजपा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार वहां भी भाजपा के दो पार्षदों पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के आरोप लगे हैं और संबंधित मामलों की जांच जारी है। यानी मंडी में भाजपा जहां मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव जीतकर नगर निगम पर कब्जा जमा चुकी है, वहीं धर्मशाला और सोलन में राजनीतिक तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है।

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