शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के भीतर लंबे समय से सुलग रही अंतर्कलह और असंतोष की चिंगारी अब पूरी तरह से भड़क उठी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यप्रणाली से नाराज होकर पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष, पूर्व विधायक और वर्तमान कैबिनेट मंत्री चौधरी चंद्र कुमार के बेटे नीरज भारती ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। नीरज भारती का यह कदम हिमाचल कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
इस्तीफा देने के साथ ही नीरज भारती ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक बेहद आक्रामक पोस्ट डालकर सुक्खू सरकार की पूरी कलई खोल कर रख दी है। उन्होंने साफ किया है कि सरकार की मौजूदा व्यवस्था और कार्यशैली से वह खुद को पूरी तरह से असंतुष्ट महसूस कर रहे हैं।
अध्यक्ष विनय कुमार को भेजा इस्तीफा
नीरज भारती ने 4 जून, 2026 को अपना लिखित त्यागपत्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक विनय कुमार और जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को भेज दिया। इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे की भनक लगते ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। नीरज ने अपने इस्तीफे की प्रति और सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया।
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उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह फैसला उनके लिए बेहद भावुक और कठिन था, क्योंकि उन्होंने हमेशा कांग्रेस के एक वफादार और निष्ठावान सिपाही के रूप में काम किया है, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है।
भारती ने सुक्खू सरकार की उधेड़ी परतें
बता दें कि इस्तीफा देने से पहले नीरज भारती पिछले रोज से ही अपने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक पोस्ट डाल कर अपनी भड़ास सुक्खू सरकार पर निकाल रहे थे। निकाय चुनाव को लेकर उन्होंने सुक्खू सरकार को जमकर घेरा और उसके बाद उन्होंने कई ऐसे पोस्टें डाली जिसने सुक्खू सरकार की अंदरूनी परतों को उखाड़ कर रख दिया है। तो आईए जानते हैं कि नीरज भारती ने अपनी पोस्ट में क्या क्या लिखा....
इस्तीफा देने के बाद नीरज भारती की पोस्टें...
- कोई एहसान नहीं किया था प्रदेश कांग्रेस का उपाध्यक्ष बना कर..... भाजपा के खिलाफ लड़ाइयां लड़ी हैं..... संघर्ष किया है..... तुम्हारी तरह जूते चाट कर कोई पद हासिल नहीं किया था.
- महीने के 5 अटैची इक्कठे होते है 2 खुद रखे जाते हैं 3 दिल्ली भेजे जाते हैं....
- हिमाचल प्रदेश के इतिहास में लिखा जाएगा कि अगर हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का किसी ने बेड़ागर्क किया तो वो 2 दो सुख ही थे.....
- जिसने भाजपा सरकार के समय हिमाचल प्रदेश में विपक्ष के तौर पर मोर्चा संभाल कर रखा..... विधानसभा के अंदर भी और बाहर भी भाजपा के खिलाफ कांग्रेस को मजबूती देने का काम किया..... संघर्ष किया..... पार्टी के लिए लड़ाइयां लड़ी..... लेकिन जब मुख्यमंत्री बनाने की बारी आई तो उसे ही इग्नोर कर दिया..... और ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना दिया..... जो कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनने के बावजूद अपने विधानसभा क्षेत्र से बाहर ही नहीं निकला....
- 4 और 64 का अंतर रहेगा..... जिसको शक है पोस्ट सेव करके रख लेना..... कुछ दिनों पहले तक ये आंकड़ा 8 और 60 का था..... लेकिन स्थानीय निकायों और पंचायती राज चुनावों के परिणामों के बाद दोबारा अपडेट हुआ है.....
- जिन विधायकों (कुछ मंत्रियों) ने सुक्खू जी का समर्थन किया था मुख्यमंत्री बनाने के लिए..... वो भी आज की तारीख में, एक-दो को छोड़ कर, बंद कमरों में सिसकियां लेते हैं..... लेकिन खुल कर बोल नहीं पाते..... उनको भी पता है कि कुछ बोलेंगे तो कारण बताओ नोटिस आ जाएगा..... लेकिन दिल्ली में बैठे लोग शायद वो कारण देखना ही नहीं चाहते.....
- बंद कमरों में सुनता कौन है..... इसीलिए सोशल मीडिया पर आना पड़ता है..... ताकि लोगों को भी सच्चाई पता चले..... जिस तरह अपराधी सिर्फ जुल्म करने वाला नहीं होता..... जुल्म सहने वाला भी कहीं न कहीं उतना ही जिम्मेदार होता है..... वैसे ही सिर्फ अनुशासन के डर से चुप बैठने वाला भी पार्टी के लिए उतना ही गुनाहगार है..... जितना पार्टी को धोखा देने वाला....
सुक्खू सरकार पर तीखा हमला
नीरज भारती ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सीधा निशाना साधते हुए सरकार और संगठन के बीच बढ़ती दूरियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा:
"हजारों समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ सड़कों पर कड़ा संघर्ष किया और दिन-रात एक करके कांग्रेस को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाया। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने उन मेहनती और संघर्षशील कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से निराश किया है।"
भारती ने आरोप लगाया कि जिन 'हार्डकोर' कार्यकर्ताओं ने पार्टी के लिए अपना समय, ऊर्जा और सम्मान दांव पर लगाया, आज सरकार बनने के बाद उन्हीं जमीनी कार्यकर्ताओं को
उपेक्षित, अनसुना और हाशिये पर धकेल दिया गया है। आज कांग्रेस का सच्चा कार्यकर्ता खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
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सामंजस्य बैठाना असंभव, इसलिए पद छोड़ा
भारती ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सत्ता और संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ रही यह खाई ही पार्टी में गहरी हताशा का कारण बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दमघोंटू और उपेक्षापूर्ण परिस्थितियों के बीच वह स्वयं को सामंजस्य स्थापित करने में पूरी तरह असमर्थ पा रहे हैं। इसी कारण उन्होंने खुद को इस संगठनात्मक दायित्व और उपाध्यक्ष पद से अलग करने का उचित निर्णय लिया है।
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हिमाचल की राजनीति गरमाई
कैबिनेट मंत्री के बेटे और खुद पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (CPS) रह चुके नीरज भारती के इस कदम ने हिमाचल की सियासत में भूचाल ला दिया है। इसे कांग्रेस संगठन के भीतर मुख्यमंत्री सुक्खू के खिलाफ बढ़ते व्यापक असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी आलाकमान संगठन को एकजुट और मजबूत करने के दावे कर रहा है, प्रदेश उपाध्यक्ष का यह तीखा इस्तीफा सुक्खू सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। फिलहाल, इस पूरे सियासी घटनाक्रम और सरकार की कलई खुलने के बाद कांग्रेस आलाकमान या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
