शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में अपना चौथा बजट पेश करते हुए वित्तीय चुनौतियों के बीच संतुलित विकास का खाका पेश किया। करीब 54 हजार करोड़ रुपये के इस बजट में सरकार ने सभी गारंटियों को पूरा करने का दावा किया, हालांकि सीमित संसाधनों के चलते कई कड़े फैसलों के संकेत भी दिए गए।
सीएम बोले संतुलन बनाना बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र से मिलने वाली रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने से प्रदेश को हर साल लगभग 8 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
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इसी कारण इस बार बजट का आकार घटाकर लगभग 54,928 करोड़ रुपये रखना पड़ा, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार को विकास कार्यों और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है।
पिछली सरकारों पर साधा निशाना
बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, हरित ऊर्जा और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार कुछ नए कदम उठा सकती है, जिनमें शराब की कीमतों में वृद्धि, पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त सेस और एंट्री टैक्स में बदलाव जैसे प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं।
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सीएम सुक्खू ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि पहले रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट का सही उपयोग किया जाता, तो राज्य का कर्ज काफी हद तक कम किया जा सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से हिमाचल को हजारों करोड़ रुपये का बकाया अभी तक नहीं मिला है, जबकि इस पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी हैं।
विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच नोकझोंक
बजट भाषण के दौरान विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री द्वारा विपक्ष पर सहयोग न करने का आरोप लगाए जाने के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया, जिसके चलते उन्हें कुछ समय के लिए अपना भाषण रोकना पड़ा।
