#अपराध

March 21, 2026

हिमाचल LSD मामले में बुरे फंसे 4 पुलिसवाले : नशा तस्करों के बने मददगार...नौकरी पर गिरी गाज

पुलिसवालों तस्करों संग मिल बेच रहे थे LSD- खुल गई पोल

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले ने पुलिस विभाग की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब एक करोड़ रुपये की LSD बरामदगी से जुड़े इस मामले में स्पेशल टास्क फोर्स STF के चार पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी के बाद अब उनके खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

पहले निलंबन, फिर गिरफ्तारी...

CID के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने के बाद गिरफ्तार किया गया और अदालत से चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग की नीति नशा तस्करी जैसे मामलों में पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। किसी भी स्तर पर लिप्त पाए जाने वाले कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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फैले नेटवर्क की जांच

जिला शिमला में पकड़ी गई LSD की खेप ने जांच को अब कुल्लू तक पहुंचा दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह नशीला पदार्थ गोवा से लाया गया और शिमला पहुंचने से पहले कुल्लू में इसकी सप्लाई चेन सक्रिय थी।

STF के चार पुलिसवाले अरेस्ट

इसी कड़ी में STF के चारों पुलिस कर्मियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, जो उस समय कुल्लू क्षेत्र में तैनात थे। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि पुलिस कर्मियों और तस्करों के बीच यह गठजोड़ कब से चल रहा था और कितने समय से प्रदेश में इस तरह का नेटवर्क सक्रिय था।

 

All Four STF Personnel to be Dismissed in LSD Trafficking Case; Layers of Drug Network Operating in Kullu

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उठ रहे गंभीर सवाल

खास तौर पर नविएल हैरिसन नाम के एक कथित सप्लायर की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जिस पर पहले से ही कुल्लू क्षेत्र में नशा तस्करी से जुड़े आरोप लगते रहे हैं। फिलहाल, पुलिस की जांच प्रारंभिक चरण में है, लेकिन जिस तरह के आरोप सामने आए हैं- उन्होंने STF जैसी विशेष इकाई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस रिमांड पर चारों आरोपी

आरोप है कि संबंधित कर्मियों ने पहले नशे की खेप को पकड़ा, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया। जिसके बाद वही LSD शिमला तक पहुंच गई। गिरफ्तारी के बाद चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 23 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पूछताछ के दौरान पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि इस पूरे नेटवर्क में उनकी भूमिका क्या थी और किन-किन लोगों से उनके संपर्क थे।

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मोबाइल फोन बनेंगे अहम सबूत

मामले की जांच में तकनीकी साक्ष्य भी अहम भूमिका निभाने वाले हैं। पुलिस ने चारों आरोपियों के मोबाइल फोन कब्जे में ले लिए हैं और अब कॉल डिटेल, मैसेज, लोकेशन और अन्य डिजिटल डेटा के जरिए पूरे नेटवर्क को खंगालने की तैयारी है।

अन्य तीन सो भी गहन पूछताछ

इसके अलावा, पहले से न्यायिक हिरासत में चल रहे अन्य आरोपियों नविएल हैरिसन, संदीप और प्रिया के बयानों का भी मिलान किया जा रहा है। इन बयानों और पुलिस कर्मियों से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

 

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17 पुलिसवालों पर कार्रवाई

यह पहला मामला नहीं है जब पुलिस विभाग के अंदर से इस तरह की संलिप्तता सामने आई हो। जानकारी के अनुसार, इससे पहले भी 17 पुलिस कर्मियों पर नशा तस्करी या उससे जुड़े मामलों में विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है। इससे साफ है कि विभाग अब अपनी छवि सुधारने और आंतरिक अनुशासन मजबूत करने के लिए सख्त रुख अपना रहा है।

कई थानों में दे चुके ड्यूटी

गिरफ्तार किए गए चारों पुलिस कर्मी पहले विभिन्न इकाइयों में सेवाएं दे चुके हैं। इनमें से कुछ CID, जबकि अन्य थर्ड बटालियन पंडोह और कुल्लू जिले के अलग-अलग थानों में तैनात रह चुके हैं। वर्तमान में ये सभी STF की मध्य क्षेत्र मंडी इकाई में बजौरा के पास तैनात थे।

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पुलिस महकमे में हड़कंप

इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। संभावना जताई जा रही है कि आगे की जांच के लिए पुलिस टीम आरोपियों को कुल्लू ले जाकर मौके पर जांच और साक्ष्य जुटा सकती है।

कानून के रक्षक ही निकले गलत

यह मामला सिर्फ नशा तस्करी का नहीं, बल्कि उस भरोसे पर भी चोट है- जो आम जनता पुलिस व्यवस्था पर करती है। जिन पर कानून लागू कराने की जिम्मेदारी होती है, अगर वही कानून तोड़ने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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गहन जांच में जुटी एजेंसियां

अब यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को कितनी गहराई तक उजागर कर पाती हैं और दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई होती है। फिलहाल प्रदेश में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस पर निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई होगी- ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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