शिमला। हिमाचल प्रदेश अब तेजी से ऐसे राज्यों की श्रेणी में शामिल होता जा रहा है- जहां बुजुर्ग आबादी लगातार बढ़ रही है और बच्चों की संख्या घटती जा रही है। प्रदेश की बदलती जनसंख्या बेहद चिंता की बात है।

हिमाचल की बदलती जनसंख्या

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम SRS 2024 की रिपोर्ट ने हिमाचल में बदलती जनसंख्या संरचना को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, आने वाले सालों में हिमाचल को सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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बूढ़ों की संख्या लगातार बढ़ रही

रिपोर्ट के अनुसार, 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की आबादी के मामले में केरल देश में पहले स्थान पर है- जहां बुजुर्ग आबादी 15.1 प्रतिशत दर्ज की गई है। दूसरे स्थान पर तमिल नाड़ू है- जहां यह आंकड़ा 14.2 प्रतिशत है।

तीसरे स्थान पर हिमाचल

हिमाचल 13 प्रतिशत बुजुर्ग आबादी के साथ देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यह राष्ट्रीय औसत 9.7 प्रतिशत से काफी अधिक है और इस बात का संकेत देता है कि राज्य की जनसंख्या तेजी से वृद्धावस्था की ओर बढ़ रही है।

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महिलाओं की बुजुर्ग आबादी ज्यादा

प्रदेश में महिलाओं की बुजुर्ग आबादी पुरुषों की तुलना में अधिक दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुष बुजुर्ग आबादी 12.4 प्रतिशत जबकि महिलाओं की संख्या 13.6 प्रतिशत है।

ग्रामीण क्षेत्रों के हाल

ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों की हिस्सेदारी 13.2 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 10.9 प्रतिशत दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

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बच्चों की संख्या हो रही कम

हिमाचल में बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार 0 से 4 वर्ष आयु वर्ग की आबादी केवल 6.5 प्रतिशत रह गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 7.9 प्रतिशत है। ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 6.6 प्रतिशत और शहरों में सिर्फ 5.1 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसके मुकाबले बिहार में इसी आयु वर्ग की आबादी 11.1 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि हिमाचल उन राज्यों में शामिल हो चुका है जहां जन्मदर तेजी से नीचे जा रही है।

 

विशेषज्ञ इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण मान रहे हैं। महिलाओं की शिक्षा का स्तर बढ़ना, परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता, छोटे परिवारों की सोच, युवाओं का देर से विवाह करना और बढ़ती अविवाहित आबादी जैसे कारणों का सीधा असर जन्मदर पर पड़ा है।

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आधी से ज्यादा आबाधी अविवाहिता

रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 44.5 प्रतिशत आबादी अविवाहित है। वहीं 51.7 प्रतिशत आबादी विवाहित श्रेणी में आती है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। विधवा, तलाकशुदा अथवा अलग रह रही आबादी 3.8 प्रतिशत दर्ज की गई है।

 

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि फिलहाल हिमाचल के पास कार्यशील आबादी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। 15 से 59 वर्ष आयु वर्ग की आबादी 66.5 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत के लगभग बराबर है।

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युवाओं की संख्या भी घटी

शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 71.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पुरुषों की कार्यशील आबादी 66.3 प्रतिशत और महिलाओं की 66.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले वर्षों में बच्चों और युवाओं की संख्या लगातार घटती रही तो भविष्य में श्रमशक्ति पर असर पड़ सकता है।

तेजी से कम हो रही आबादी

0 से 14 वर्ष आयु वर्ग की आबादी भी हिमाचल में तेजी से कम हो रही है। राज्य में यह आंकड़ा 20.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि राष्ट्रीय औसत 24 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 20.7 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 18 प्रतिशत है। इसके विपरीत मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बच्चों और किशोरों की आबादी काफी अधिक है।

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स्कूलों में भी संख्या घटेगी

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में हिमाचल में स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घट सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्कूलों के विलय या बंद होने की स्थिति भी बन सकती है। साथ ही उद्योग, खेती और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाली युवा श्रमशक्ति की कमी भी महसूस की जा सकती है।

बन सकती है बड़ी चुनौती

बढ़ती बुजुर्ग आबादी और घटती युवा संख्या हिमाचल के लिए आने वाले समय में एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन सकती है। ऐसे में राज्य सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं, वृद्धजन कल्याण योजनाओं, रोजगार नीति और जनसंख्या संतुलन को लेकर दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी पड़ सकती है।

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