शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्कूलों में बेहतर और गुणात्मक शिक्षा देने के बड़े.बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। एक ओर जहां प्रदेश के सरकारी स्कूलों में हजारों पद खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर कई शिक्षक पढ़ाने के बजाय जुगाड़ के सहारे शिक्षा निदेशालय में बाबूगिरी कर रहे हैं। इस स्थिति ने सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कूलों में शिक्षक कम, दफ्तरों में ज्यादा
प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के 11 हजार से अधिक पद रिक्त हैं, जिससे पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसके उलट करीब 30 शिक्षक ऐसे हैं जो स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय शिक्षा निदेशालय में फाइलें निपटाने में लगे हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि निदेशालय में जहां महज पांच पदों पर ही तैनाती की आवश्यकता है, वहां करीब 30 शिक्षकों को एडजस्ट किया गया है। यह स्थिति व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए काफी है।
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जुगाड़ से मिली तैनाती
सूत्रों के अनुसार इन शिक्षकों ने प्रभाव और जुगाड़ के जरिए अपनी तैनाती निदेशालय में करवा ली है। सहायक निदेशक जैसे पदों पर भी लंबे समय से एक ही कैडर के अधिकारी जमे हुए हैं। इतना ही नहीं कुछ शिक्षक उपनिदेशक और खंड प्रारंभिक शिक्षा कार्यालयों में भी दफ्तरी काम संभाल रहे हैं, जबकि उनकी मूल जिम्मेदारी स्कूलों में पढ़ाना है।
सरकार के दावे बनाम जमीनी हकीकत
सुक्खू सरकार लगातार शिक्षा के स्तर को सुधारने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावे कर रही है। लेकिन जब शिक्षक ही स्कूलों से बाहर रहेंगे, तो इन दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षक यदि कक्षाओं की बजाय दफ्तरों में बैठेंगे, तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ना तय है।
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मंत्री के निर्देश पर भी नहीं हुई कार्रवाई
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर कई बार डेपुटेशन समाप्त कर शिक्षकों को वापस स्कूलों में भेजने के निर्देश दे चुके हैं। कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बावजूद कई शिक्षक अब भी निदेशालय और अन्य कार्यालयों में तैनात हैं। पूर्व सरकार के समय भी इस व्यवस्था को खत्म करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
रिक्त पदों का बढ़ता आंकड़ा
प्रदेश में शिक्षकों के कुल 11,716 पद खाली हैं, जिनमें प्रधानाचार्य से लेकर जेबीटी तक कई महत्वपूर्ण श्रेणियां शामिल हैं। हाल ही में करीब 1500 शिक्षक सेवानिवृत्त भी हुए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। ऐसे में जहां स्कूलों में शिक्षकों की कमी साफ नजर आ रही है, वहीं दफ्तरों में शिक्षकों की तैनाती व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
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शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षकों की तैनाती सही तरीके से स्कूलों में की जाए, तो शिक्षा का स्तर और बेहतर हो सकता है। लेकिन मौजूदा हालात में संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक ढांचे की खामियों को उजागर करती है, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े करती है।
मंत्री का बयान
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का कहना है कि विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षकों को डेपुटेशन के बजाय स्कूलों में भेजा जाए। उन्होंने कहा कि यदि अभी भी कुछ शिक्षक गलत तरीके से तैनात हैं, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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बड़ा सवाल: कब सुधरेगी व्यवस्था?
हिमाचल में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जहां एक ओर नई नीतियां बनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर मौजूदा व्यवस्थाओं की खामियां सामने आ रही हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इन विसंगतियों को दूर कर पाएगी, या फिर स्कूलों में शिक्षक की कमी और दफ्तरों में उनकी मौजूदगी का यह विरोधाभास यूं ही जारी रहेगा।
