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April 4, 2026

हिमाचल: बाबा बालक नाथ के दरबार में हुआ चमत्कार- परिवार ने की अरदास, बोलने लगा 3 वर्षीय बच्चा

बाबा बालक नाथ के मंदिर बच्चे को लेकर पहुंचे माता-पिता

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3 YEARS BOY FAMILY WISH FULFIL BABA BALAK NATH TEMPLE SHAHTALAI HIMACHAL

बिलासपुर। उत्तर भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर में आस्था, विश्वास और चमत्कार का एक ऐसा भावुक प्रसंग सामने आया है- जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु को भावुक कर दिया। दिल्ली से आए एक परिवार की वर्षों की पीड़ा जब खुशियों में बदली, तो मंदिर परिसर में आंसुओं के साथ आभार और विश्वास दोनों झलकते नजर आए।

बाबा बालक नाथ ने किया चमत्कार

जानकारी के अनुसार, दिल्ली निवासी एक दंपत्ति अपने तीन वर्षीय बेटे सिमरन के साथ पिछले वर्ष शाहतलाई दरबार पहुंचे थे। उस समय बच्चा जन्म से ही बोलने में असमर्थ था। कई जगह इलाज करवाने के बावजूद जब कोई ठोस परिणाम नहीं मिला, तो परिवार ने अंततः बाबा बालक नाथ के दरबार में आस्था के साथ अरदास लगाने का निर्णय लिया।

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नहीं बोलता था बच्चा

मंदिर के पुजारी पंडित सरवण कुमार शर्मा के माध्यम से परिवार ने पूरे विधि-विधान से बाबा के चरणों में प्रार्थना की। उस समय माता-पिता की एक ही मन्नत थी कि उनका बेटा सामान्य बच्चों की तरह बोल सके। अरदास के दौरान परिवार की आंखों में उम्मीद और दर्द दोनों साफ झलक रहे थे।

बालक नाथ ने पूरी की अरदास

बताया जा रहा है कि अरदास के कुछ समय बाद ही बच्चे के व्यवहार में हल्के बदलाव नजर आने लगे थे। धीरे-धीरे उसने आवाजें निकालनी शुरू कीं और कुछ महीनों के भीतर शब्दों का उच्चारण करने लगा। एक वर्ष पूरा होते-होते सिमरन अब साफ-साफ बोलने लगा है। इस बदलाव को परिवार किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहा।

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साफ शब्दों में बोलने लगा बच्चा

जब बच्चा अपने माता-पिता को पुकारता है और सामान्य बच्चों की तरह बात करता है, तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। इसी खुशी और कृतज्ञता के साथ यह परिवार एक बार फिर बाबा के दरबार पहुंचा। मंदिर में शीश नवाते समय माता-पिता की आंखें नम थीं, लेकिन इस बार उन आंसुओं में दर्द नहीं, बल्कि संतोष और श्रद्धा थी।

 

baba balaknath temple shahtalai

सच्चे मन से मांगी गई मुराद होती है पूरी

पंडित सरवण कुमार शर्मा ने इस घटना को बाबा की कृपा का प्रत्यक्ष उदाहरण बताते हुए कहा कि कलियुग में भी बाबा बालक नाथ की महिमा उतनी ही प्रभावशाली है। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद यहां अवश्य पूरी होती है और जो श्रद्धालु विश्वास के साथ आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता।

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बाबा के दरबार में टेक रहे माथा

इन दिनों शाहतलाई में चैत्र मास के मेले भी चल रहे हैं, जिससे यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे माहौल में सिमरन की यह कहानी लोगों के बीच आस्था को और मजबूत कर रही है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इस घटना को सुनकर और भी विश्वास के साथ बाबा के दरबार में मत्था टेक रहे हैं।

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