शिमला। हिमाचल प्रदेश में भांग से जुड़ी इंडस्ट्री को लेकर सुक्खू सरकार ने नए नियम जारी कर दिए हैं। सरकार ने भांग की खेती और इससे जुड़े कारोबार को लेकर लाइसेंस प्रक्रिया और कई जरूरी शर्तें तय की हैं। नए नियमों के तहत सरकार ने इस पूरे क्षेत्र के लिए लाइसेंस फीस, सुरक्षा राशि, निवेश और अलग-अलग तरह के शुल्क की व्यवस्था तय की है। सरकार का उद्देश्य भांग से जुड़ी गतिविधियों को एक तय कानूनी और नियंत्रित व्यवस्था के तहत लाना है, ताकि इसके इस्तेमाल और कारोबार पर निगरानी रखी जा सके।
खेती करने वालों को भी लेना होगा लाइसेंस
आदेश के अनुसार भांग की खेती करने के इच्छुक किसानों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और अन्य संस्थाओं को इसके लिए लाइसेंस लेना होगा। बिना अनुमति के भांग की खेती नहीं की जा सकेगी। इसके लिए आवेदक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा और तय लाइसेंस शुल्क भी जमा करवाना होगा। सरकार ने खेती से लेकर आगे की पूरी प्रक्रिया के लिए अलग-अलग नियम तय किए हैं।
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भांग रखने और गोदाम चलाने के लिए अलग लाइसेंस
अगर कोई व्यक्ति या संस्था भांग को स्टोर करना चाहती है या इसके लिए गोदाम चलाना चाहती है, तो उसे अलग से भंडारण लाइसेंस लेना होगा। इसके तहत भांग के भंडारण की जगह और वहां रखे जाने वाले कच्चे माल का रिकॉर्ड रखना जरूरी होगा। सरकार की ओर से लाइसेंसधारकों को निर्धारित रिकॉर्ड और रजिस्टर भी बनाए रखने होंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर विभागीय अधिकारी इसकी जांच कर सकें।
भांग से उत्पाद बनाने के लिए जरूरी होगा सीएच-एम लाइसेंस
भांग से जुड़े उत्पादों के निर्माण और प्रोसेसिंग के लिए सीएच-एम लाइसेंस लेना जरूरी होगा। इसके लिए इच्छुक व्यक्ति या संस्था को निर्धारित आवेदन प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। इसका मतलब है कि राज्य में भांग से तेल या अन्य उत्पाद बनाने वाली किसी भी विनिर्माण इकाई को सरकार से पहले अनुमति लेनी होगी। बिना लाइसेंस के ऐसी गतिविधियां चलाने पर कार्रवाई की जा सकती है।
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विनिर्माण लाइसेंस के लिए 5 लाख रुपये की प्रतिभूति राशि
सरकार ने विनिर्माण लाइसेंस लेने वालों के लिए 5 लाख रुपये की प्रतिभूति राशि जमा करना अनिवार्य किया है। यह राशि लाइसेंसधारक को तय नियमों और शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जमा करनी होगी। इसके अलावा सरकार ने भांग आधारित विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश अनिवार्य किया है। यानी इस तरह की इकाई स्थापित करने के लिए बड़ी पूंजी और निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा।
कच्चे माल के परिवहन के लिए भी परमिट जरूरी
भांग से जुड़े कच्चे माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए भी विशेष अनुमति लेनी होगी। इसके लिए सीएच-टी परमिट और सीएच-पी पास की व्यवस्था की गई है। यानी बिना जरूरी परमिट और पास के कच्चे माल का परिवहन नहीं किया जा सकेगा। इससे सरकार को भांग से जुड़े कच्चे माल की आवाजाही पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।
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कच्चे माल पर 10 रुपये प्रति किलोग्राम शुल्क
नए नियमों के तहत कच्चे माल की प्राप्ति पर 10 रुपये प्रति किलोग्राम प्राप्ति शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं तैयार कैनबिस तेल और अन्य उत्पादों पर 15 प्रतिशत उत्पादन शुल्क लगाया जाएगा। इससे साफ है कि सरकार ने भांग से जुड़े उत्पादों के निर्माण और बिक्री की प्रक्रिया के लिए अलग-अलग शुल्क तय किए हैं।
विनिर्माण इकाइयों के कारोबार पर लगेगा 3 प्रतिशत उपकर
इसके अलावा विनिर्माण इकाइयों के सालाना कारोबार पर 3 प्रतिशत राज्य उपकर/अधिभार भी लगाया जाएगा। इसमें 2 प्रतिशत दुग्ध उपकर और 1 प्रतिशत पर्यावरण उपकर शामिल है। इस तरह लाइसेंस फीस और उत्पादन शुल्क के अलावा कारोबार के आधार पर भी संबंधित इकाइयों को तय शुल्क देना होगा।
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रिकॉर्ड और रिटर्न जमा करना होगा जरूरी
सरकार ने लाइसेंसधारकों के लिए रिकॉर्ड, रजिस्टर और रिटर्न समय पर जमा करना भी अनिवार्य किया है। भांग की खेती, भंडारण, परिवहन और निर्माण से जुड़ी गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। विभाग की ओर से जब भी रिकॉर्ड या दस्तावेज मांगे जाएंगे, तो लाइसेंसधारक को उन्हें उपलब्ध करवाना होगा।
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नियमों का उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना
सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माने का भी प्रावधान किया है। आदेश के अनुसार नियम तोड़ने पर 20 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। कर एवं आबकारी विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। नए नियमों के बाद अब भांग से जुड़ी खेती, निर्माण और अन्य गतिविधियां सरकार की तय व्यवस्था और निगरानी के तहत संचालित होंगी।
