शिमला। हिमाचल प्रदेश में असिस्टेंट स्टाफ नर्सों की आउटसोर्स भर्ती को लेकर चल रहे विवाद में सुक्खू सरकार को फिलहाल राहत नहीं मिली है। बीते कल यानी मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट से भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक हटाने अथवा पहले से घोषित परिणाम के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने की अनुमति देने का आग्रह किया।

दो सप्ताह में मांगा आउटसोर्स भर्ती का पूरा ब्यौरा

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार सबसे पहले पिछले वर्षों में आउटसोर्स माध्यम से की गई सभी नियुक्तियों का विस्तृत रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश करे।

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अदालत ने दो सप्ताह के भीतर विभागवार आंकड़े उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया और नई नीति की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया जा सके। हालांकि अदालत ने सरकार की इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और पहले विस्तृत तथ्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

नई भर्ती नीति पर अदालत ने जताई चिंता

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से एक हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नई नीति तैयार की गई है। इस नीति के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति निश्चित अवधि के लिए होगी और उन्हें तय मासिक मानदेय दिया जाएगा। साथ ही भविष्य में वरिष्ठता या अन्य सेवा लाभों का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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अदालत ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी नीति युवाओं के भविष्य और रोजगार सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे खड़े करती है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा कि सरकार ने नियमित भर्ती के बजाय इस मॉडल को अपनाने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया।

याचिकाकर्ताओं ने जताई कड़ी आपत्ति

सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि विभिन्न विभागों से आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं और पूरा रिकॉर्ड तैयार करने में कुछ समय लगेगा। इस पर अदालत ने सीमित समय के लिए अतिरिक्त अवसर देते हुए सरकार को निर्धारित अवधि के भीतर सभी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि स्वास्थ्य विभाग में बड़ी संख्या में नियमित पद खाली हैं, लेकिन उन्हें भरने के बजाय अस्थायी व्यवस्था लागू की जा रही है। उनका कहना था कि इससे न केवल चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकार से नियमित भर्ती प्रक्रिया अपनाने की मांग दोहराई।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में स्थायी नियुक्तियों के स्थान पर सीमित अवधि की व्यवस्था लागू करने को लेकर कई कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न खड़े हो रहे हैं। अदालत अब सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड और जवाब के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी।

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फिलहाल असिस्टेंट स्टाफ नर्स भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक जारी रहेगी। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें सरकार को आउटसोर्स भर्ती से जुड़े आंकड़े और नई नीति के औचित्य पर विस्तृत जवाब देना होगा। इसके बाद ही अदालत आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी।

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