शिमला: हिमाचल प्रदेश की जनता पर महंगाई का एक और जोरदार झटका पड़ा है। हर घर की रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी के दाम अचानक तेजी से बढ़ गए हैं। कुछ दिन पहले तक जहां बाजार में चीनी करीब 45 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वहीं अब कई इलाकों में इसका भाव 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यानी उपभोक्ताओं को एक किलो चीनी के लिए करीब 15 से 20 रुपये तक अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।
चीनी के दामों में इस अचानक उछाल ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। रसोई में चाय और नाश्ते से लेकर बच्चों के लिए बनने वाले पकवानों तक, चीनी की जरूरत हर घर में रहती है। ऐसे में इसके दाम बढ़ने का असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ना तय है। वहीं त्योहारों का सीजन नजदीक होने के कारण लोगों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि चीनी महंगी होने का सीधा असर मिठाइयों और चीनी से तैयार होने वाले दूसरे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
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रसोई का बजट बिगड़ा, गृहिणियों की बढ़ी चिंता
चीनी के बढ़े हुए दामों ने सबसे ज्यादा असर घर के मासिक बजट पर डाला है। पहले जहां परिवार सामान्य कीमत पर चीनी खरीदकर अपना खर्च आसानी से संभाल लेते थे, वहीं अब अचानक बढ़ी कीमत ने घरेलू हिसाब-किताब बिगाड़ दिया है। आम लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ने से पहले ही घर चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में चीनी जैसी जरूरी चीज के दाम में अचानक इतनी बड़ी बढ़ोतरी परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गई है। खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को इसका सीधा असर झेलना पड़ रहा है।
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चाय की चुस्की से मिठाई की मिठास तक पड़ेगा असर
चीनी के महंगे होने का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। सुबह की चाय से लेकर दिनभर दुकानों पर बिकने वाली चाय, मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत भी बढ़ सकती है। नाहन में चाय बेचने वाले छोटे कारोबारी ने बताया कि कुछ दिन पहले तक उन्हें चीनी 45 से 48 रुपये किलो के आसपास मिल रही थी, लेकिन अब यही चीनी 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गई है। छोटे दुकानदारों के लिए यह बढ़ोतरी इसलिए भी बड़ी चुनौती है क्योंकि ग्राहक चाय की कीमत तुरंत बढ़ाने को तैयार नहीं होते। ऐसे में अतिरिक्त लागत का दबाव सीधे दुकानदार के मुनाफे पर पड़ रहा है।
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त्योहारों से पहले महंगाई की मार, मिठाई खरीदना होगा महंगा
त्योहारी सीजन नजदीक होने के कारण चीनी की कीमत में बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। राखी और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ती है। मिठाई तैयार करने में चीनी की बड़ी भूमिका होने के कारण कच्चे माल की कीमत बढ़ने का असर अंतिम उत्पाद पर पड़ सकता है। कुल्लू निवासी सुभाष गौतम ने बताया कि पहले चाय 10 रुपये में मिलती थी, लेकिन अन्य लागत बढ़ने के बाद कई जगह इसकी कीमत 15 रुपये हो चुकी है। अब चीनी महंगी होने से कुछ दुकानदार चाय के लिए 20 रुपये तक मांगने लगे हैं। उनका कहना है कि त्योहारों के समय मिठाइयां भी महंगी हुईं तो आम परिवारों के लिए त्योहार का खर्च और बढ़ जाएगा।
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मांग और सप्लाई के बीच असंतुलन को बताया जा रहा वजह
व्यापारियों के मुताबिक फिलहाल चीनी की मांग अधिक और सप्लाई अपेक्षाकृत कम होने के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि बढ़ी कीमतों के पीछे वास्तविक स्थिति को लेकर बाजार में पूरी तरह स्पष्टता नहीं है और केंद्र सरकार की ओर से इस बढ़ोतरी पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। कारोबारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मांग और बढ़ती है तथा आपूर्ति में सुधार नहीं होता है तो कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आम जनता की सरकार से मांग- जल्द मिले राहत
चीनी के बढ़े दामों से परेशान उपभोक्ताओं की मांग है कि सरकार बाजार की स्थिति पर नजर रखे और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमत में अचानक इतनी बड़ी बढ़ोतरी आम परिवारों के लिए चिंता का विषय है।
