कुल्लू। यह तो हम सब जानते हैं कि भगवान श्री कृष्ण ने माता देवकी के गर्भ से जन्म लिया। मगर फिर भी वह देवकी की बजाय मां यशोदा के पुत्र कहलाते हैं। आज के इस युग में हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की सुर्दशना ठाकुर भी बच्चों के लिए यशोदा मां से कम नहीं हैं।

कर रही बेसहारा बच्चों का पालन पोषण

सुदर्शना ठाकुर कुल्लू जिला का एक जाना-पहचाना नाम हैं। सुदर्शना ठाकुर बेसहारा बच्चों को मां का प्यार देती हैं। वह एक ऐसी मां हैं, जो बेसहारा बच्चों का पालन पोषण भी कर रही हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की ट्रेनिंग भी दे रही हैं। यह भी पढ़ें: हिमाचल: 16 वर्षीय लड़की घर से गायब, पिता ने बताया- बेटी को किसने भगाया

बेसहारा बच्चों का सहारा हैं सुदर्शना

बता दें कि सुदर्शना ठाकुर मनाली के साथ लगते खखनाल क्षेत्र में बेसहारा बच्चों की मदद के लिए राधा एनजीओ नाम की एनजीओ चलाती हैं। मौजूदा समय में सुदर्शना के पास 18 साल से ज्यादा की उम्र के 15 बच्चे हैं। सुदर्शना साल 1997 से बेसहारा बच्चों को सहारा दे रही हैं। सुदर्शना बच्चों के खाने-पीने से लेकर पढ़ाई तक का पूरा खर्चा उठा रही हैं।

ऐसे बनी बेसहारा बच्चों की मां

सुदर्शना ने बताया कि साल 1997 में उन्होंने सड़कों पर कुछ जरूरतमंद बच्चों को घूमते देखा। इनमें से कुछ बच्चों की मां नहीं थी, कुछ के पिता नहीं थे और कई पूरी तरह से अनाथ थे। ऐसे में सुदर्शना ने इन बच्चों को पालन पोषण करने का फैसला लिया। हालांकि, ऐसा करने के लिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। यह भी पढ़ें: निर्दलीय विधायकों के मामले में नया मोड़: स्पीकर दरकिनार- विधायकी बरकरार

जिंदगी में नहीं मानी कभी हार

बच्चों के पालन पोषण के लिए उन्होंने अपने गहने तक बेच दिए। उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब बच्चों को खाना खिलाने के लिए उनके पास एक पैसा नहीं बचा था। मगर तब भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सड़कों पर जुराबें, आचार बेच-बेच कर उन्होंने बच्चों का पालन पोषण किया। यह भी पढ़ें: हिमाचल में BJP को हराना कांग्रेस के लिए मुश्किल: लोकसभा में बदल जाता है समीकरण

अच्छे मुकाम पर पहुंचे बच्चे

सुदर्शना ने बताया कि प्रशासन ने उनकी एनजीओ से कुछ बच्चों को बाल आश्रम में भेज दिया था। मगर वह बच्चे फिर से वहां से लौटकर उनके पास आकर रहने लगे। सुदर्शना बताती हैं कि एनजीओ के कुछ बच्चे आज सरकारी नौकरियां और कुछ निजी नौकरियां कर रहे हैं। कुछ बच्चों की शादी हो गई है और उनके परिवार भी है। मगर फिर भी यह सभी बच्चे आज भी उनसे मिलने आते हैं और एनजीओ में रह रहे अन्य बच्चों की मदद के लिए हाथ बढ़ाते हैं।