शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों और शिक्षकों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर आज बड़ा फैसला हो सकता है। स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और शिक्षा विभाग की प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए सोमवार को शिमला स्थित राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित होगी।
14 सूत्रीय मांगपत्र पर विस्तार से चर्चा
बैठक की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर करेंगे, जिसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। बैठक में शिक्षकों और विभागीय संघों की ओर से सौंपे गए 14 सूत्रीय मांगपत्र पर विस्तार से चर्चा होने के साथ कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।
यह भी पढ़ें : सावन 2026 : पहले सोमवार का व्रत आज, जानिए कैसे करें महादेव को प्रसन्न
शिक्षकों के युक्तीकरण पर रहेगा फोकस
बैठक का प्रमुख एजेंडा प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को दूर करना रहेगा। विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार शिक्षकों के युक्तीकरण (रैशनलाइजेशन) की नीति पर भी विचार किया जाएगा।
इसके अलावा शहरों के स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों और ग्रामीण क्षेत्रों में खाली पड़े पदों के बीच संतुलन बनाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था तैयार करने पर चर्चा होगी, ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
यह भी पढ़ें : मानसून का रौद्र रूप जारी : हिमाचल में टूट रहे पहाड़, 7 जिलों में हाई अलर्ट
लंबित पदोन्नतियों पर भी हो सकता है फैसला
शिक्षा विभाग प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न संवर्गों की लंबित पदोन्नतियों पर भी निर्णय ले सकता है। बैठक में टीजीटी, पीजीटी और सीएंडवी शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े मामलों को एजेंडे में शामिल किया गया है।
क्षतिग्रस्त स्कूलों के लिए राहत योजना
हालिया मानसून के दौरान प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में बैठक में क्षतिग्रस्त भवनों के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए राहत राशि जारी करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : विधवा मां का दर्द- PGI में जिंदगी की जंग लड़ रहा इकलौता बेटा, लोगों से मांगी मदद
हजारों रिक्त पद बने चुनौती
प्रदेश में लंबे समय से शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं, जिसका सबसे अधिक असर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि रिक्त पदों को भरने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का मुद्दा लगातार प्रमुखता से उठता रहा है।
