शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे अनुभवी और लोकप्रिय नेता, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं। IGMC शिमला में लंबी बीमारी के बाद उन्होंने 8 जुलाई 2021 को तड़के अंतिम सांस ली। उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद वेंटीलेटर पर रखा गया था, लेकिन किस्मत ने एक पूरा युग हमसे छीन लिया।

वीरभद्र सिंह की चौथी जयंती

उनकी चौथी जयंती पर आज जब हिमाचल उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है, तो उनकी राजनीतिक विरासत, सामाजिक फैसलों और मानवीयता की छाप हर दिल में ताजा हो रही है।

यह भी पढ़ें : स्व. राजा वीरभद्र सिंह लिखना चाहते थे आत्मकथा, अंत समय तक नहीं आ पाई किताब- जानें अनसुने किस्से

राजा साहब की कुछ ऐतिहासिक और अविस्मरणीय उपलब्धियां:

  • शिक्षा को घर तक लाया

वीरभद्र सिंह कहते थे — “मैं थोक का व्यापारी हूं शिक्षा का।” उन्होंने हजारों स्कूल और कॉलेज गांव-गांव में खोले, खासकर दुर्गम क्षेत्रों की लड़कियों के लिए शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित की।

  • रोजगार को खोला

उनके समय में हिमाचल में नौकरियों के पिटारे खुले। हज़ारों बेरोज़गार युवाओं को सरकारी विभागों में नौकरी मिली।

  • नहीं लौटाता था कोई खाली हाथ

जरूरतमंदों को अपनी जेब से मदद देते — कभी किराया, कभी बेटी के विवाह के लिए शगुन। उनका दरबार जनसेवा का असली केंद्र था।

  • कड़े कानून, साफ़ नीति
    धर्मांतरण और गोवध पर सख्त कानून बनाए। परिजनों द्वारा बुजुर्गों की देखभाल न करने पर दंड का प्रावधान किया।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : जिंदगी की जंग लड़ रहे रोहित, परिवार की जेब खाली- कल PGI में है सर्जरी; मदद को बढ़ाएं हाथ

  • ब्यूरोक्रेसी को थी सीधी चेतावनी

वे कहते थे — “मेरे मुंह से निकला हर शब्द आदेश है।” अफसरों में उनके लिए विशेष सम्मान और अनुशासन का भाव था।

  • हर दुर्गम को जोड़ा सड़क से

डोडरा-क्वार, पांगी, किन्नौर, लाहौल-स्पीति तक सड़कें पहुंचीं। उन्होंने भौगोलिक दूरी नहीं, बल्कि संवेदनशीलता से शासन चलाया।

  • राज्य के हितों के लिए सख्त

पड़ोसी राज्यों और केंद्र से हिमाचल के हक के लिए पूरी ताकत से लड़ते रहे — चाहे पानी का मसला हो या बिजली परियोजनाएं।

  • शीत सत्र धर्मशाला में, संतुलन की मिसाल

विधानसभा का सत्र पहली बार धर्मशाला में शुरू कर क्षेत्रीय संतुलन की नीति अपनाई।

यह भी पढ़ें : पिता ने घराट चलाकर पाला परिवार, कई बार भूख तक सोए- अब डॉक्टर बनेगा बेटा

  • अटल टनल और उच्च शिक्षा के संस्थान

अटल टनल की फाइलें उनकी मेज पर भी गंभीरता से चलीं। IIT, Central University, Law University के लिए उन्होंने जमीन तैयार की।

  • वेतन नहीं लिया कभी विधायक रहते

राजनीति को सेवा मानते थे, सौदा नहीं। पूरी जिंदगी विधायक रहे लेकिन वेतन नहीं लिया।

पेज पर वापस जाने के लिए यहां क्लिक करें