शिमला। हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम आगे बढ़ाया गया है। लंबे समय से चली आ रही मांगों और कई औपचारिकताओं के बाद अब पंचायतों के पुनर्गठन को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
हिमाचल में 39 नई पंचायतों का गठन
इसके साथ ही आगामी पंचायती राज चुनावों की तैयारियां भी तेज हो गई हैं, जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल है। पंचायती राज विभाग हिमाचल प्रदेश ने शुक्रवार को 40 प्रस्तावित नई पंचायतों में से 39 के गठन की अधिसूचना जारी कर दी।
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क्या होगा नई पंचायतों के गठन से?
एक पंचायत, जो मंडी जिले से संबंधित बताई जा रही है, उसके गठन में तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से अभी पेच फंसा हुआ है। विभाग के अनुसार उस पर भी जल्द निर्णय लिया जाएगा। नई पंचायतों के गठन के बाद अब प्रदेश में कुल पंचायतों की संख्या बढ़कर 3,616 हो गई है। इससे पहले यह आंकड़ा 3,577 था। यानी एक साथ 39 पंचायतें जुड़ने से ग्रामीण प्रशासन का दायरा और व्यापक हो गया है।
नई पंचायतों की सीमाएं तय
अधिसूचना जारी होने के बाद अगला चरण पुनर्सीमांकन (री-डिमार्केशन) का है। विभागीय सूत्रों के अनुसार एक सप्ताह के भीतर नई पंचायतों की सीमाएं तय कर दी जाएंगी। इसमें गांवों और वार्डों की स्पष्ट सीमांकन प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि चुनाव से पहले किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे। हालांकि विभाग के पास अन्य क्षेत्रों से भी नई पंचायतें बनाने के प्रस्ताव आ रहे हैं, लेकिन फिलहाल चुनावी प्रक्रिया को देखते हुए नए गठन पर रोक रखी गई है।
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तीन चरणों में होगा चुनाव
प्रदेश में पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव तीन अलग-अलग चरणों में करवाने की तैयारी है। चुनावी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
35 हजार कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी
करीब 35 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी चुनाव में लगाई जा सकती है। वहीं, पूरे प्रदेश में लगभग 22 हजार मतदान केंद्र स्थापित किए जाने का अनुमान है। संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान का कार्य भी समानांतर रूप से किया जा रहा है।
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जल्द ही जारी होगी गाइडलाइन
हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्शन कमीशन की ओर से जल्द ही आयुक्तों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इनमें नामांकन प्रक्रिया, मतदान का समय, मतगणना की व्यवस्था और आवश्यक प्रशासनिक प्रोटोकॉल स्पष्ट किए जाएंगे।
इसके अलावा मतदान कर्मियों के लिए चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि न हो। स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी आवश्यक सावधानियों को भी दिशा-निर्देशों में शामिल किया जाएगा।
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31 मई से पहले चुनाव
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकार को 31 मई से पहले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव संपन्न कराने हैं। इसी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
क्या बोले मंत्री अनिरुद्ध?
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि नई पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है और अब पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य है कि चुनाव पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से संपन्न हों।
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नई पंचायतों से जागी कई उम्मीदें
नई पंचायतों के गठन से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी और लोगों को अपने नजदीक प्रशासनिक सुविधा मिल सकेगी।
