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June 4, 2026
सुक्खू सरकार की लॉटरी के नियम तैयार, 3 माह में पहला ड्रा; 5 करोड़ के इनाम को कितने में मिलेगा टिकट
सुक्खू सरकार की लॉटरी से खाली खजाना भरने की तैयारी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में करीब 27 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर लॉटरी की टिकटें बिकती हुई नजर आएंगी। सूबे की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने अपने खाली खजाने को भरने और राजस्व बढ़ाने के लिए राज्य में दोबारा लॉटरी सिस्टम शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री सुक्खू के कड़े निर्देशों के बाद राज्य के वित्त विभाग ने इस पूरी योजना का एक विस्तृत कानूनी ड्राफ्ट (नियम) तैयार कर लिया है। इस नई नीति के तहत प्रदेश सरकार ने अगले तीन महीने के भीतर लॉटरी का पहला लकी ड्रा निकालने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया है।
हिमाचल सरकार इस समय गंभीर आर्थिक संकट और खाली खजाने की चुनौती से जूझ रही है। ऐसे में राजस्व जुटाने के लिए लॉटरी को एक बड़े हथियार के रूप में देखा जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से राज्य को सालाना करीब 100 करोड़ रुपये का बंपर राजस्व (कमाई) हासिल होगा।
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आपको बता दें कि पंजाब, सिक्किम और केरल जैसे राज्य पहले से ही लॉटरी के जरिए अपने राज्यों के लिए मोटा राजस्व कमा रहे हैं और अब इसी तर्ज पर हिमाचल भी आगे बढ़ रहा है। इससे पहले साल 1998 में तत्कालीन धूमल सरकार ने कथित घोटालों और सामाजिक कुरीतियों का हवाला देकर प्रदेश में लॉटरी पर पूरी तरह से बैन लगा दिया था।
वित्त विभाग द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट में आम जनता के लिए बेहद आकर्षक इनामों का प्रस्ताव रखा गया है। इस लॉटरी योजना में लोगों को 1 लाख रुपये से लेकर पूरे 5 करोड़ रुपये तक के बंपर इनाम जीतने का मौका मिल सकता है।
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ड्राफ्ट के अनुसार बाजार में साप्ताहिक (Weekly), मासिक (Monthly) और त्योहारों पर विशेष बंपर ड्रा के विकल्प खुले रहेंगे। हालांकि, लॉटरी का अंतिम साइज क्या होगा, ड्रा कितनी बार निकाला जाएगा और इनाम का सटीक ढांचा कैसा होगा, इस पर अंतिम मुहर खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ही लगाएंगे।
इस बार की लॉटरी आधुनिक और डिजिटल रंग में रंगी होगी। सरकार ने दोतरफा रणनीति बनाई है:
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सुक्खू सरकार की इस योजना का एक बड़ा फायदा राज्य के बेरोजगार युवाओं को भी मिलने वाला है। सरकार इन युवाओं को लॉटरी का आधिकारिक एजेंट बनाएगी, जिससे उन्हें बेहतर कमीशन के जरिए रोजगार का एक नया साधन मिलेगा।
इसके अलावा, लॉटरी की बिक्री से जो भी राजस्व (पैसा) इकट्ठा होगा, उसका एक निश्चित हिस्सा राज्य में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और सबसे महत्वपूर्ण—'नशा निवारण कोष' में जमा किया जाएगा, ताकि युवाओं को नशे की गर्त से बाहर निकाला जा सके।
लॉटरी से जुड़ा यह नया एजेंडा इसी हफ्ते होने वाली कैबिनेट (मंत्रिमंडल) की बैठक में पेश किया जा सकता है। मंत्रिमंडल से हरी झंडी मिलते ही नियमों को अधिसूचित कर दिया जाएगा। इसके बाद अगले 60 दिनों के भीतर लॉटरी का संचालन करने के लिए एक योग्य ऑपरेटर का चयन करने हेतु ग्लोबल टेंडर जारी कर दिया जाएगा, ताकि तीन महीने के भीतर पहला ड्रा जनता के सामने हो।