#विविध
June 4, 2026
हिमाचल: MC के 'खौफ' ने छीन ली 32 वर्षीय युवक की सांसें, सड़कों पर उतरे लोग; FIR दर्ज करने की मांग
नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान घायल हुए चंदन की अस्पताल में थमी सांसें
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान घायल हुए रेहड़ी-फड़ी lapkyd चंदन की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो जाने के बाद मामला तूल पकड़ गया है। चंदन की मौत से नाराज रेहड़ी-फड़ी यूनियन और विभिन्न श्रमिक संगठनों ने बुधवार को नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान करने की मांग उठाई।
चंदन की मौत की खबर सामने आते ही रेहड़ी-फड़ी यूनियन, सीटू और अन्य श्रमिक संगठनों के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोगों ने शहर में प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नगर निगम की कार्रवाई के दौरान उत्पन्न हुए भय और अफरा-तफरी के माहौल के कारण चंदन गंभीर रूप से घायल हुआ था। उनका कहना है कि यदि उस समय इस प्रकार की कार्रवाई नहीं होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।
जानकारी के अनुसार 31 मई को आईजीएमसी के समीप नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ मुहिम चल रही थी। इसी दौरान बिहार के समस्तीपुर निवासी 32 वर्षीय चंदन जो शिमला में रेहड़ी लगाकर आजीविका चला रहा था, अपना सामान बचाने के प्रयास में भागने लगा। इसी दौरान वह गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद उसे उपचार के लिए आईजीएमसी में भर्ती करवाया गया, जहां चार दिनों तक आईसीयू में इलाज चलने के बाद बुधवार को उसकी मौत हो गई। चंदन की मौत के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रंग पकड़ लिया है।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि चंदन की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए और निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है, बल्कि रोज कमाकर परिवार चलाने वाले हजारों गरीब और मेहनतकश लोगों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
यूनियन और श्रमिक संगठनों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किए जाने की मांग प्रमुख है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चंदन अपने परिवार का सहारा था और उसकी मौत के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया है। ऐसे में सरकार को मानवीय आधार पर तत्काल राहत प्रदान करनी चाहिए।
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में नगर निगम आयुक्त और संयुक्त आयुक्त कार्यालय का घेराव करने के साथ-साथ व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। उनका आरोप है कि शहर में रेहड़ी-फड़ी विक्रेताओं के साथ लगातार सख्ती बरती जा रही है, जबकि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बने कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा।
उधर नगर निगम प्रशासन ने मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि मृतक रेहड़ी धारक नगर निगम में पंजीकृत नहीं था। निगम का दावा है कि उसका सामान जब्त नहीं किया गया था और न ही उसके खिलाफ किसी प्रकार की सीधी कार्रवाई की गई थी। नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि मामले की जांच तथ्यों के आधार पर की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।