चंबा। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में श्रद्धालु और पर्यटक इस यात्रा पर नहीं जा सकेंगे।
यात्रा पर निकले तो होगी FIR
आमतौर पर यह यात्रा हर साल अगस्त महीने में विधिवत रूप से शुरू होती है। मगर मौसम साफ होने पर कई बार स्थानीय गाइड अप्रैल-मई में भी श्रद्धालुओं को ऊपरी क्षेत्रों की ओर ले जाते हैं।
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बर्फबारी के बीच प्रशासन का कठोर फैसला
इस बार अप्रैल में हुई भारी बर्फबारी और खराब रास्तों को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सख्त फैसला लेते हुए यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन के अनुसार, फिलहाल यात्रा मार्ग पर भारी बर्फ जमी हुई है।
यात्रा करना जोखिम भरा
कई जगहों पर पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम तेजी से बदल रहा है, जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे में अभी यात्रा करना बेहद जोखिम भरा है।
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नियम नबीं माने तो...होगी सख्त कार्रवाई
SDM विकास शर्मा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर कोई गाइड या व्यक्ति श्रद्धालुओं को मणिमहेश की ओर ले जाते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अगले आदेश तक आवाजाही पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया है।
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भगवान शिव का निवास
समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश झील भगवान शिव के प्रमुख आस्था स्थलों में से एक मानी जाती है। इसे मणिमहेश कैलाश नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव का निवास है और हर साल हजारों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
शांति और पुण्य हासिल
परंपरा के अनुसार यह यात्रा जन्माष्टमी के अवसर पर शुरू होती है और राधाष्टमी के दिन पवित्र स्नान के साथ संपन्न होती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस झील में स्नान करने से आत्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।
