शिमला। हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी की बाट जोह रहे हजारों आश्रितों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार अब नियमों में अहम छूट देने की तैयारी में है, जिससे पात्र आश्रितों की सरकारी नौकरी पाने की राह आसान हो सके। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को कैबिनेट सब कमेटी की सिफारिशें सौंप दी गई हैं और जल्द ही यह प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा।

 

कई अहम छूटों पर विचार, आय सीमा बढ़ सकती है


करुणामूलक नौकरी के मामलों में सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही वार्षिक आय सीमा को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। वर्तमान में यह सीमा ₹62,500 सालाना है, जिसे बढ़ाकर ₹2.5 लाख तक किया जा सकता है। इस कदम से बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को लाभ मिलेगा जो वर्तमान सीमा में फिट नहीं बैठते थे।

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जिनके सिर पर कोई नहीं, उन्हें मिलेगी प्राथमिकता


कैबिनेट सब कमेटी ने विशेष रूप से उन मामलों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है जहां आश्रित पूरी तरह अनाथ हैं, यानी माता-पिता दोनों का साया सिर से उठ चुका है। यह फैसला करुणा और न्याय के भाव को नीतिगत रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

 

3,234 मामले अटके


वर्तमान में करुणामूलक आधार पर कुल 3,234 मामले सरकार के पास लंबित हैं। इनमें से 1,531 मामले विभिन्न सरकारी विभागों में और 1,703 बोर्ड-निगमों में अटके हैं। इनमें अधिकांश युवा उच्च शिक्षित हैं और योग्यता के अनुसार उच्च पदों की मांग कर रहे हैं।

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पुरानी अधिसूचना बनी बाधा

 

22 सितंबर 2022 को जयराम सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना के तहत एक बार रिजेक्ट हो चुके मामलों पर दोबारा विचार नहीं किया जा सकता। वर्तमान सरकार इस अधिसूचना को हटाने पर अभी निर्णय नहीं ले पाई है, जिससे कई योग्य और जरूरतमंद आश्रित आज भी नौकरी से वंचित हैं।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर एक नई और ज्यादा मानवीय करुणामूलक नीति पर विचार हो रहा है। सरकार चाहती है कि सेवा के दौरान परिवार गंवाने वालों को इंसाफ और सम्मान के साथ जीवन पुनः शुरू करने का मौका मिले।

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