कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में माता के दरबार सिर्फ पूजा का स्थान नहीं होते, बल्कि भरोसे और विश्वास का ठिकाना माने जाते हैं। यहां लोग अपनी चिंता, पीड़ा और उम्मीदें माता को सौंप देते हैं। मान्यता है कि जब मनोकामना पूरी होती है, तो भक्त दिखावे से दूर रहकर चुपचाप अपना आभार अर्पित करते हैं। ऐसा ही एक दृश्य  विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी के धाम में देखने को मिला- जिसने आस्था की इसी परंपरा को फिर जीवंत कर दिया।

चांदी का छत्र किया दान

प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता ज्वालामुखी मंदिर में पंजाब से आए एक श्रद्धालु ने माता रानी के चरणों में करीब 880 का चांदी का छत्र अर्पित किया। यह भेंट न किसी घोषणा के साथ आई और न ही किसी प्रचार के उद्देश्य से। श्रद्धालु ने अपनी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का आग्रह किया।

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माता ने की मुराद पूरी

श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले माता ज्वाला के दरबार में मन्नत मांगी थी। माता ने उनकी वो मुराद पूरी कर दी है। इसी खुशी में वो अपने परिवार के साथ माता को भेंट अर्पित करने ज्वालामुखी पहुंचे हैं।

 

चांदी का छत्र चढ़ाया

पुजारी के अनुसार यह भेंट किसी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थी। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु ने बस इतना कहा कि माता ने उसकी चिंताएं हर ली है और मुरादें पूरी की हैं। ऐसे में यह समर्पण उनका निजी भाव है।

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चरणों में चढ़ाई भेंट

मंदिर के पुजारी कपिलमुनि ने पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ पूजा संपन्न करवाई। इसके बाद श्रद्धालु ने चांदी का सुंदर छत्र माता के चरणों में समर्पित कर दिया। इस दौरान परिवार भावुक नजर आया।

भक्तों की मुराद पूरी करती हैं मां 

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार माता ज्वाला अपने भक्तों पर हमेशा अपना आशीर्वाद बनाए रखती है। जब किसी भक्त की मुराद पूरी होती है, तो वह इसे शब्दों में नहीं, समर्पण के रूप में व्यक्त करता है। मंदिर में हुआ यह दान उसी अटूट विश्वास का एक और उदाहरण बन गया।

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