शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC) में भर्ती मरीजों से मिलने के लिए अब नए नियम लागू किए गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने वार्डों में भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पास सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत, केवल पास धारक तीमारदारों को ही वार्ड में प्रवेश की अनुमति होगी। यदि कोई व्यक्ति बिना पास वार्ड में प्रवेश करता है, तो उसे 1000 रुपये का जुर्माना देना होगा।
मरीजों की सुविधा-सुरक्षा को लेकर लिया निर्णय
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने बताया कि वार्डों में भीड़ को कम करने और मरीजों को आरामदायक माहौल देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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मरीजों से मिलने का समय तय किया गया है, जिससे बेवजह भीड़भाड़ न हो और उपचार में किसी तरह की बाधा न आए।
कैसे काम करेगा पास सिस्टम?
- प्रत्येक मरीज के लिए एक पास जारी किया जाएगा।
- एक समय में केवल एक ही तीमारदार पास के माध्यम से वार्ड में प्रवेश कर सकेगा।
- बिना पास वार्ड में प्रवेश करने वाले तीमारदारों को 1000 रुपए का फाइन भरना होगा।
- अस्पताल में पहले से ही पास की सुविधा शुरू की जा चुकी है, जिससे मरीजों की देखभाल करने वाले परिजनों को अधिक सुविधा मिलेगी।
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अस्पताल में विभिन्न विभागों के वार्ड
IGMC में कई विभागों के वार्ड मौजूद हैं, जिनमें मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, नेत्र रोग, ईएनटी, श्वसन रोग और त्वचा रोग समेत अन्य शामिल हैं। यहां 800 से 900 मरीज हर समय भर्ती रहते हैं। आमतौर पर हर मरीज के साथ तीन से चार तीमारदार मौजूद रहते हैं, जिससे वार्ड और अस्पताल परिसर में भीड़ बढ़ जाती है। मरीजों को आराम देने और संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए पास सिस्टम लागू किया गया है।
नए नियमों का उद्देश्य
1. वार्डों में भीड़ को नियंत्रित करना– मरीजों के उपचार में बाधा न आए और उन्हें आरामदायक माहौल मिल सके।
2. सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना– बिना पास किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को वार्ड में प्रवेश से रोकना, जिससे चोरी या अन्य अवांछित घटनाओं पर नियंत्रण किया जा सके।
3. संक्रमण के खतरे को कम करना– अधिक भीड़ से अस्पतालों में संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। सीमित लोगों के प्रवेश से इसे रोका जा सकेगा।
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अस्पताल प्रशासन की अपील
अस्पताल प्रशासन ने मरीजों और उनके परिजनों से अपील की है कि वे नए नियमों का पालन करें और निर्धारित समय पर ही मरीजों से मुलाकात करें। इससे अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से चल सकेगी और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
