मंडी। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रदेश में अब एचआरटीसी (HRTC) पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी लंबित मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
पेंशन में देरी से बढ़ा आक्रोश
हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) पेंशनर कल्याण संगठन, मंडी इकाई का कहना है कि पिछले कई महीनों से पेंशन का भुगतान नियमित रूप से नहीं हो रहा है। पेंशनरों को अब एकमुश्त भुगतान के बजाय 15 और 30 तारीख को दो किस्तों में पेंशन दी जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय तक प्रदेश की सेवा करने वाले पेंशनरों में इस व्यवस्था को लेकर गहरा असंतोष है।
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महंगाई भत्ता और एरियर बना बड़ा मुद्दा
पेंशनरों ने आरोप लगाया है कि 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) बढ़ोतरी और पिछले तीन महीनों से लंबित एरियर का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। वहीं, सेवारत कर्मचारियों को यह लाभ समय पर मिल चुका है। इसके अलावा करीब 50 हजार रुपये की एरियर किस्त भी अभी तक जारी नहीं की गई है, जिससे पेंशनरों में नाराजगी और बढ़ गई है।
तीन साल से ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर परेशानी
संगठन का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से करीब 9000 HRTC पेंशनर “व्यवस्था परिवर्तन” के नाम पर अव्यवस्था झेल रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 70 वर्ष से अधिक आयु के अन्य सरकारी पेंशनरों को 2016 से लंबित एरियर का पूरा भुगतान मिल चुका है, लेकिन HRTC पेंशनरों को अभी तक एक भी पैसा नहीं दिया गया है।
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सरकार से वित्तीय प्रावधान बढ़ाने की मांग
संगठन के प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि आगामी बजट में HRTC को दी जाने वाली ग्रांट-इन-एड को 750 करोड़ से बढ़ाकर 870 करोड़ रुपये किया जाए। साथ ही पेंशन के नियमित भुगतान के लिए हर महीने कम से कम 25 करोड़ रुपये का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या न हो।
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बैठक में बना आंदोलन का खाका
इन सभी मुद्दों को लेकर मंडी में आयोजित बैठक में करीब 90 पेंशनरों ने भाग लिया। बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो पेंशनर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। पेंशनरों की यह नाराजगी ऐसे समय सामने आई है जब राज्य सरकार पहले से ही वित्तीय दबाव और विभिन्न मुद्दों से जूझ रही है। ऐसे में HRTC पेंशनरों का यह आंदोलन सुक्खू सरकार के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।
