#विविध

August 1, 2026

हिमाचल: तीन मासूम हुए बेसहारा... मां छोड़कर चली गई, पिता पहुंचा जेल; अब प्रशासन ने थामा हाथ

एक पल में उजड़ गई तीन मासूमों की दुनिया

शेयर करें:

three child una News

ऊना। कई बार जिंदगी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां एक हंसता-खेलता परिवार देखते ही देखते बिखर जाता है। ऐसा ही दिल को झकझोर देने वाला मामला हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से सामने आया है। यहां तीन मासूम बच्चों की जिंदगी पर अचानक ऐसा संकट टूट पड़ा कि उनके सिर से मां-बाप दोनों का साया एक साथ उठ गया। पहले मां बच्चों को छोड़कर चली गई और इसके कुछ समय बाद पिता पोक्सो अधिनियम के तहत न्यायिक हिरासत में जेल पहुंच गया। माता-पिता से अलग होने के बाद तीनों मासूम पूरी तरह बेसहारा हो गए, लेकिन ऐसे मुश्किल समय में जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई।

परिवार टूटा तो बच्चों पर आया सबसे बड़ा संकट

बताया जा रहा है कि परिवार में आई इस अप्रत्याशित परिस्थिति के बाद तीनों बच्चे पूरी तरह संरक्षण से वंचित हो गए थे। न तो उनके पास देखभाल करने वाला कोई अभिभावक बचा और न ही भविष्य को लेकर कोई सहारा दिखाई दे रहा था। बच्चों की स्थिति सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: मेरी पत्नी को भगा ले गया युवक... पति ने थाने में की शिकायत, गहने - 85 हजार नगद भी ले गई साथ

दो बच्चों को बाल संस्थान में मिला आश्रय

जिला बाल संरक्षण अधिकारी कमलदीप सिंह ने बताया कि बाल कल्याण समिति ने बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया। दो बच्चों को सुरक्षित देखभाल, शिक्षा और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) में भेजा गया है, जहां उनकी पूरी जिम्मेदारी संस्थान की ओर से उठाई जाएगी।

दो वर्षीय मासूम को मिला परिवार का स्नेह

वहीं सबसे छोटे, महज दो वर्षीय बच्चे को संस्थान भेजने के बजाय पारिवारिक माहौल में पालन-पोषण देने का फैसला लिया गया। बच्चे का पुनर्वास उसके ताया-ताई के पास किया गया है ताकि वह परिवार के बीच रहकर बेहतर वातावरण में बड़ा हो सके। इसके साथ ही बच्चे को सरकार की मिशन वात्सल्य स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे उसके पालन-पोषण, शिक्षा और अन्य जरूरी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

 

यह भी पढ़ें : कर्मचारियों-पेंशनरों को मिलेगा 15% DA- एरियर! हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार को दी 12 सप्ताह की मोहलत

कोई बच्चा बेसहारा नहीं रहेगा

जिला बाल संरक्षण अधिकारी कमलदीप सिंह ने कहा कि 18 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, शिक्षा और समग्र विकास सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी बच्चे के सामने ऐसी संकटपूर्ण स्थिति आती है तो कानून और शासन के दिशा-निर्देशों के तहत तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जरूरतमंद बच्चे को असहाय नहीं छोड़ा जाएगा और समय पर उसे संरक्षण व पुनर्वास उपलब्ध कराया जाएगा।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल पुलिस चौकी के बजट से चमका दी SP की कोठी, विजिलेंस के रडार पर संजीव गांधी..

संवेदनशील मामले ने झकझोरा हर किसी को

ऊना का यह मामला सिर्फ एक परिवार के टूटने की कहानी नहीं, बल्कि यह भी बताता है कि कठिन परिस्थितियों में प्रशासनिक संस्थाएं किस तरह आगे बढ़कर मासूम बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने का प्रयास करती हैं। फिलहाल तीनों बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और प्रशासन उनकी शिक्षा, देखभाल तथा सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख