शिमला। हिमाचल प्रदेश की सियासत में केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर जारी खींचतान के बीच एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। प्रदेश की सुक्खू सरकार जहां अक्सर केंद्र की मोदी सरकार पर सौतेला व्यवहार करने के आरोप लगाती रही है] वहीं अब विधानसभा के बजट सत्र में पेश आंकड़ों ने नई बहस को जन्म दे दिया है।
बजट सत्र के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को विभिन्न मदों के तहत कुल 44,519 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। यह खुलासा उस समय हुआ जब भाजपा के विधायकों ने केंद्र से मिलने वाली सहायता को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी।
आरडीजी पर विवाद, लेकिन हजारों करोड़ की सहायता
प्रदेश सरकार लगातार रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) खत्म करने के फैसले का विरोध कर रही है और इसे हिमाचल के साथ अन्याय बता रही है। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि बीते तीन वर्षों में राज्य को आरडीजी के रूप में ही करीब 17 हजार करोड़ रुपये मिल चुके हैं। वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत वर्ष 2023-24 में 8058 करोड़, 2024-25 में 6258 करोड़ और 2025-26 में 31 जनवरी तक 2714 करोड़ रुपये राज्य को मिले हैं।
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केंद्रीय योजनाओं में भी बड़ी हिस्सेदारी
केवल आरडीजी ही नहीं, बल्कि केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के तहत भी हिमाचल को बड़ी आर्थिक मदद मिली है। तीन साल की अवधि में इन योजनाओं के तहत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि राज्य को दी गई है। साल दर साल देखें तो 5239 करोड़, 6155 करोड़ और 4062 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में हिमाचल को मिले हैं।
आपदा और स्थानीय निकायों को भी फंड
आपदा प्रबंधन के लिए भी केंद्र की ओर से लगातार धनराशि जारी की गई। एसडीआरएफ के तहत तीन वर्षों में क्रमश: 361 करोड़, 371 करोड़ और 398 करोड़ रुपये दिए गए, जबकि स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड (SDMF) में भी करोड़ों रुपये जारी हुए। स्थानीय निकायों को भी इस दौरान 277 करोड़, 610 करोड़ और 734 करोड़ रुपये मिले, जिससे जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति मिली।
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लोन और NABARD से भी सहयोग
केंद्र सरकार की ओर से लोन और अग्रिम के रूप में भी राज्य को पर्याप्त सहायता दी गई है। तीन वर्षों में यह राशि 1600 करोड़ से लेकर 2500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के आसपास रही।
इसके अलावा नाबार्ड के जरिए भी हिमाचल को बड़ी मदद मिली है। वर्ष 2023-24 में 331 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लागत 2500 करोड़ रुपये से अधिक है। कैपिटल वर्क्स के लिए भी 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी गई।
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सियासी बहस तेज होने के आसार
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद अब प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है। एक तरफ राज्य सरकार केंद्र पर भेदभाव के आरोप लगाती रही है, वहीं दूसरी ओर सामने आए आंकड़े केंद्र से मिली बड़ी आर्थिक मदद की तस्वीर पेश कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में और अधिक गर्मा सकता है कि आखिर हकीकत क्या है—सौतेला व्यवहार या पर्याप्त आर्थिक सहयोग।
