शिमला। हिमाचल प्रदेश में आम जनता को जल्द ही महंगाई का एक और झटका लगने वाला है। हिमाचल की सुक्खू सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। इसके तहत सरकार पेट्रोल और डीजल पर नया "अनाथ एवं विधवा सेस" लगाने का प्रस्ताव लेकर आई है। जिससे आने वाले समय में लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

5 रुपए प्रति लीटर बढ़ सकते हैं दाम

विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण के तीसरे दिन सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने मूल्य वर्धित कर से जुड़े संशोधन विधेयक को सदन में पेश किया। इस प्रस्ताव के तहत पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर अधिकतम 5 रुपये प्रति लीटर तक सेस लगाने का रास्ता साफ किया जा रहा है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 5 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि अंतिम दर तय करने का अधिकार सरकार के पास रहेगा, लेकिन इस प्रस्ताव ने पहले ही आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

 

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सरकार का तर्क, कल्याण के लिए जरूरी कदम

सरकार का कहना है कि यह सेस अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए एक स्थायी आर्थिक व्यवस्था तैयार करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। इससे जुटाई गई राशि को एक अलग अनाथ एवं विधवा कल्याण कोष में जमा किया जाएगा, जिसका उपयोग केवल जरूरतमंदों के हित में किया जाएगा। विधानसभा में पेश दस्तावेजों के अनुसार राज्य में पहले से कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन उनके लिए स्थायी फंड की कमी महसूस की जा रही थी। इसी कमी को दूर करने के लिए यह नया आर्थिक मॉडल तैयार किया गया है।

 

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कानून बनने की प्रक्रिया जारी

विधेयक के पारित होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही यह कानून बन जाएगा और पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद ईंधन की नई दरें लागू हो सकती हैं।

खिलाड़ियों की अनदेखी पर गरमाया सदन

इसी दौरान विधानसभा में खिलाड़ियों की अनदेखी का मुद्दा भी जोर.शोर से उठा। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने सरकार से सवाल किया कि राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को पर्याप्त प्रोत्साहन और रोजगार क्यों नहीं मिल रहा।

 

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खेलों की गिरती स्थिति पर चिंता

विधायकों ने यह भी कहा कि एक समय में हिमाचल के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान रखते थे, लेकिन अब कई खेलों की स्थिति कमजोर होती जा रही है। खासतौर पर वॉलीबॉल जैसे खेलों को फिर से मजबूत करने की जरूरत बताई गई।

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