शिमला। आर्थिक दबाव से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज उठाने जा रही है। विकास कार्यों की रफ्तार बनाए रखने और सरकार की वित्तीय देनदारियों को संभालने के बीच सुक्खू सरकार अब 600 करोड़ रुपये का नया लोन लेने की तैयारी में है। नए महीने की शुरुआत में ही वित्त विभाग की ओर से इससे संबंधित अधिसूचना जारी की गई है।
ऐसे में एक ओर सरकार विकास के रथ के पहियों को गति देने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटा रही है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते यानी DA के भुगतान की चुनौती भी उसके सामने बनी हुई है। राज्य के वित्तीय हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हिमाचल की संचयी देनदारियां 2026-27 के बजट अनुमान में ₹1,12,319 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
600 करोड़ का कर्ज लेगी सुक्खू सरकार 18 साल में चुकाना होगा
वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार सरकार 600 करोड़ रुपये का कर्ज 18 साल की अवधि के लिए उठाएगी। इस ऋण पर ब्याज दर 7.78 फीसदी निर्धारित की गई है और ब्याज का भुगतान साल में दो बार किया जाएगा। बताया गया है कि जून 2024 में लिए गए कर्ज से संबंधित अधिसूचना को दोबारा जारी किया गया है। मौजूदा प्रक्रिया के तहत ऋण की रकम की व्यवस्था अक्टूबर में की जानी है और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद राशि राज्य सरकार के खजाने में आने की बात कही गई है।
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विकास का पहिया चलाने के लिए चाहिए पैसा
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क, पुल, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए लगातार बड़ी धनराशि की जरूरत रहती है। सरकार की ओर से इस ऋण का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में नया कर्ज सरकार के लिए केवल एक वित्तीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि विकास योजनाओं के लिए जरूरी धन जुटाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
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हालांकि, दूसरी तरफ बढ़ता कर्ज राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल खड़े करता है। 2026-27 के बजट दस्तावेज में सरकार ने ₹11,965 करोड़ के सकल सार्वजनिक ऋण का अनुमान रखा है। इसी बजट में राजस्व घाटा ₹6,577 करोड़ और राजकोषीय घाटा ₹9,698 करोड़ अनुमानित है।
कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित DA की चुनौती
सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी वित्तीय चुनौतियों में कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (DA/DR) का भुगतान भी शामिल है। त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर अब सरकार के अगले फैसले पर है। कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार लंबित वित्तीय लाभ जारी करने की मांग उठती रही है। ऐसे में सरकार पर दबाव है कि त्योहारों से पहले कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत देने के लिए कोई वित्तीय व्यवस्था की जाए।
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क्या फेस्टिवल ग्रांट से मिलेगी राहत?
हिमाचल सरकार की नजर केंद्र से मिलने वाली संभावित अग्रिम केंद्रीय कर हिस्सेदारी पर भी रहती है। आमतौर पर त्योहारों के आसपास राज्यों को केंद्रीय करों की किस्त अग्रिम रूप से मिलने से उन्हें तत्काल नकदी प्रबंधन में मदद मिल सकती है। हिमाचल में पहले भी त्योहारों के समय सरकार ने उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के सहारे कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित वित्तीय लाभ देने की कोशिश की है। इस बार भी कर्मचारियों की निगाह सरकार की वित्तीय व्यवस्था और आगामी घोषणा पर टिकी हुई है।
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एक लाख करोड़ पार पहुंच चुका है कर्ज
हिमाचल की आर्थिक तस्वीर में सबसे बड़ा आंकड़ा राज्य की बढ़ती देनदारियों का है। आधिकारिक बजट दस्तावेज के अनुसार 2026-27 के अंत तक संचयी ऋण ₹1,12,319 करोड़ रहने का अनुमान है। केंद्र सरकार की ओर से अगस्त 2026 में लोकसभा में दिए गए आंकड़ों में भी हिमाचल की कुल बकाया देनदारियां मार्च 2026 के बजट अनुमान के लिए करीब ₹1.10 लाख करोड़ बताई गई थीं। उसी जवाब में 2026-27 के लिए हिमाचल का ऋण-जीडीपी अनुपात 42.8 फीसदी का बजट अनुमान दर्ज किया गया था। यानी राज्य की वित्तीय तस्वीर में कर्ज अब एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है और आने वाले समय में ऋण प्रबंधन सरकार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बना रहेगा।
कर्ज के साथ कर्ज चुकाने की भी चुनौती
सरकार के लिए चुनौती केवल नया कर्ज जुटाने तक सीमित नहीं है। पुराने कर्ज की अदायगी और उस पर लगने वाला ब्याज भी राज्य के बजट पर लगातार दबाव डालता है।
2026-27 के बजट अनुमान में हिमाचल सरकार ने करीब ₹4,840 करोड़ के सार्वजनिक ऋण की अदायगी का प्रावधान किया है। वहीं, PRS के विश्लेषण के अनुसार राज्य का राजस्व घाटा लगातार बना हुआ है और 2026-27 में इसे ₹6,577 करोड़ अनुमानित किया गया है।
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सरकार के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ सरकार को सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य संस्थानों और दूसरी विकास परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराना है, तो दूसरी तरफ वेतन, पेंशन, DA, ब्याज और पुराने कर्ज की अदायगी जैसी प्रतिबद्ध देनदारियां भी हैं। ऐसे में 600 करोड़ रुपये का नया लोन सरकार के लिए तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकता है, लेकिन इसके साथ राज्य की कुल देनदारियों में भी इजाफा होगा। हिमाचल सरकार की वित्तीय नीति और आने वाले महीनों में राजस्व जुटाने की क्षमता पर अब सबकी नजर रहेगी।
