शिमला। हिमाचल प्रदेश में कानून और अदालत के आदेशों को नजरअंदाज करना एक व्यक्ति को इतना महंगा पड़ गया कि अब उसे अपनी संपत्ति तक से हाथ धोना पड़ सकता है। वर्षों तक अदालत के निर्देशों की अवहेलना करने वाले इस शख्स को पहले पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल पहुंचाया और अब न्यायालय ने उसकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश भी जारी कर दिए हैं। कुर्क की जाने वाली संपत्ति से प्राप्त राशि का उपयोग उसकी पत्नी को बकाया गुजारा भत्ता देने के लिए किया जाएगा।
बार-बार टाले अदालत के आदेश
मामला शिमला जिला के कुमारसैन क्षेत्र का है, जहां एक व्यक्ति लगातार न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर रहा था। आरोपी की पत्नी ने वर्ष 2022 में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत भरण-पोषण से संबंधित मामला अदालत में दायर किया था। न्यायालय ने कई बार आरोपी को पत्नी को गुजारा भत्ता देने के निर्देश दिए, लेकिन उसने आदेशों का पालन नहीं किया।
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दो लाख रुपये से अधिक पहुंचा बकाया
अदालत के आदेशों की लगातार अनदेखी के चलते पत्नी को दिए जाने वाले गुजारा भत्ते की बकाया राशि बढ़ते-बढ़ते दो लाख रुपये से अधिक हो गई। इसके बावजूद आरोपी ने न तो राशि जमा करवाई और न ही न्यायालय के समक्ष संतोषजनक जवाब पेश किया। इस रवैये को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए।
पुलिस ने दबोचकर पहुंचाया अदालत
काफी समय से पुलिस और अदालत की कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहे आरोपी को आखिरकार कुमारसैन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त रुख अपनाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने संबंधित राजस्व अधिकारियों को आरोपी की संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए हैं। अदालत का स्पष्ट निर्देश है कि संपत्ति से प्राप्त राशि के माध्यम से पत्नी को उसका बकाया गुजारा भत्ता दिलाया जाए। यानी अब आरोपी की जमीन-जायदाद भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ गई है।
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न्यायालय का सख्त संदेश
इस कार्रवाई को न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बार-बार अदालत के आदेशों की अनदेखी करता है, तो कानून उसके खिलाफ कठोर कदम उठाने का अधिकार रखता है। इस मामले में भी न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि पत्नी के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
कानून से भागने वालों पर सख्ती जारी
पुलिस अधिकारियों ने भी साफ किया है कि न्यायालय द्वारा जारी वारंटों की तामील और कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। अदालत के आदेशों की अवहेलना करने वाले या कानूनी प्रक्रिया से बचने का प्रयास करने वाले लोगों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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पत्नी को मिलेगा उसका कानूनी अधिकार
यह मामला उन लोगों के लिए भी एक उदाहरण है जो भरण-पोषण संबंधी आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते। अदालत ने साफ कर दिया है कि पत्नी को उसका कानूनी अधिकार हर हाल में मिलेगा, चाहे इसके लिए आरोपी की संपत्ति ही क्यों न कुर्क करनी पड़े।
