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June 18, 2026

मंत्री विक्रमादित्य के PWD पर हाईकोर्ट की सख्ती, हिन्दुस्तान-तिब्बत मार्ग की बदहाली पर मांगा जवाब

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- बरसात से पहले शुरू होता है दिखावे का पैचवर्क

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vikramaditya singh

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सूबे के कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह के लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रदेश की लाइफलाइन माने जाने वाले शिमला और किन्नौर जिलों को जोड़ने वाले ऐतिहासिक हिन्दुस्तान-तिब्बत राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-5) की बदहाली पर अदालत ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने विक्रमादित्य सिंह के विभाग को दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी के आला अधिकारियों और डिफॉल्टर ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

बरसात आते ही शुरू होता है दिखावे का पैचवर्क

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए विभाग के ढुलमुल रवैये पर तीखे सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़क पर इस समय जो कामचलाऊ और अस्थायी पैचवर्क किया जा रहा है, वह आगामी मानसून की पहली बारिश में ही बह जाएगा।

 

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खंडपीठ ने विभाग की नीयत पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि हर साल लोक निर्माण विभाग बारिश शुरू होने से ठीक पहले जागता है और मरम्मत का दिखावा शुरू करता है। इसके बाद जैसे ही मानसून में सड़क बहती है, खराब मौसम का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया जाता है। सरकारी धन की इस बर्बादी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हजारों लोगों की लाइफलाइन है ये एनएच

हिन्दुस्तान-तिब्बत राष्ट्रीय राजमार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि शिमला, रामपुर, नारकंडा और किन्नौर जैसे क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ माना जाता है। यही मार्ग सेब उत्पादक क्षेत्रों को बाजारों से जोड़ता है और किन्नौर की जलविद्युत परियोजनाओं तक पहुंच का प्रमुख रास्ता भी है। सड़क की खराब हालत के कारण स्थानीय लोगों, बागवानों, व्यापारियों और पर्यटकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।

 

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विभाग ने मौसम और बिटुमेन की कमी का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रतिकूल मौसम और बिटुमेन की उपलब्धता में कमी के कारण स्थायी मरम्मत कार्य प्रभावित हुआ है। विभाग के अनुसार वर्तमान में राजमार्ग के कई हिस्सों पर अस्थायी मरम्मत का काम चल रहा है, जबकि कुछ हिस्सों में अभी भी कार्य पूरा नहीं हो पाया है। हालांकि अदालत विभाग के इस तर्क से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई और उसने सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी।

अधिकारियों को कोर्ट में होना पड़ा पेश

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुनवाई के दौरान लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। विभाग की ओर से दाखिल शपथ पत्र में भी स्वीकार किया गया कि राजमार्ग के कई हिस्सों की हालत चिंताजनक बनी हुई है और सड़क को व्यापक सुधार की जरूरत है। अदालत ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह सड़क की स्थिति, मरम्मत कार्यों और जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों की भूमिका को लेकर विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करे।

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ठेकेदारों पर भी गिरी गाज

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रही कुछ निर्माण कंपनियां अनुबंध के तहत अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर पाईं।  विभाग ने अदालत को बताया कि संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके अनुबंध समाप्त किए गए हैं और उन पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है। अदालत ने संकेत दिए कि सड़क की बदहाली के लिए केवल विभाग ही नहीं बल्कि निर्माण एजेंसियों की भूमिका की भी जांच जरूरी है।

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मानसून में बड़े काम शुरू न करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान बड़े मरम्मत कार्य शुरू करना व्यावहारिक नहीं है। अदालत का मानना है कि ऐसे समय में किए गए कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का उचित परिणाम नहीं मिलता। इसलिए अदालत ने सुझाव दिया कि स्थायी और व्यापक मरम्मत कार्य वर्षा समाप्त होने के बाद शुरू किए जाएं, ताकि लंबे समय तक टिकाऊ समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

केंद्र को भी दिया निर्देश

हाईकोर्ट ने सड़क सुदृढ़ीकरण से जुड़े प्रस्तावों पर भी ध्यान दिया और केंद्र सरकार को इस परियोजना के लिए भेजे गए वित्तीय प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने को कहा है। अदालत का मानना है कि प्रदेश के इस रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राजमार्ग की स्थिति में सुधार के लिए वित्तीय सहायता और ठोस कार्ययोजना दोनों जरूरी हैं।

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